पटना, जेएनएन। बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य के मधेपुरा ज़िला अधिकारी के छठ पूजा से पहले अधिकारियों को लिखे एक पत्र के बहाने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला है। तेजस्वी ने ट्वीट कर लिखा है कि ज़िला अधिकारी अपने इस पत्र के माध्यम से लोकपर्व की आस्था भावना और सामाजिक ताने बाने को ख़त्म कर रहे हैं।

इसके बाद तेजस्वी ने एनसीआरबी के हाल में जारी आंकड़ों का ज़िक्र करते हुए कहा कि बिहार दंगो के मामले में अव्वल है। अब देखिए बिहार की कुकर्मी सरकार ने लोक आस्था के महापर्व छठ पर कैसा विद्वेषपूर्ण व विघटनकारी आदेश दिया था। हर जात-धर्म के लोग छठ पर्व मनाते हैं। लोकपर्व की आस्था-भावना व सामाजिक ताने-बाने को ख़त्म ना करिए।'

इसपर राज्य के गृह सचिव आमिर सुभानी का कहना है कि ये पत्र हमलोगों के संज्ञान में भी आया है और हमने ज़िलाधिकारी से इस सम्बंध में बातचीत भी की है। इस पत्र का आशय ये कतई नहीं था कि एक समुदाय विशेष के लोगों को आहत किया जाए। लेकिन आमिर सुभानी ने कहा कि उन्हें सलाह दी गयी हैं कि भाषा के संदर्भ में भविष्य में सतर्क रहें।

दरअसल, छठ से पहले मधेपुरा के जिलाधिकारी ने छठ पर्व पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश जारी किया था। पत्र में लिखे एक पैरा पर विवाद हो गया है जिसमें लिखा है, 'छठ घाट तक व्रतियों के आने-जाने वाले मार्गों में पड़ने वाले मुहल्लों में विशेषकर मुस्लिम मोहल्लों में विशेषकर नाली का पानी गिराए जाने के कारण तनाव उत्पन्न होता है।

आगे लिखा है कि कभी-कभी छठ घाट पर बहुत अधिक भीड़ में घाट पर बनाए गए कोशी टूट जाने के कारण भी समस्या उत्पन्न होती है। मुस्लिम समुदाय के शरारती तत्वों द्वारा छठ व्रतियों के परिजनों तथा उनके साथ महिलाओं के साथ छेड़खानी किए जाने पर तनाव उत्पन्न होता है।

छठ व्रतियों तथा उनके परिजनों पर छींटाकशी, फब्ती कस देने के कारण भी विधि-व्यवस्था की  समस्या उत्पन्न होती है।' मधेपुरा के जिलाधिकारी के द्वारा लिखे इस पत्र से एक बार फिर बिहार की नीतीश सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। 

Posted By: Kajal Kumari

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