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लालू यादव ने क्यों छोड़ा RJD अध्यक्ष पद? 5 प्वॉइंट में समझें तेजी से बदलती सियासत के मायने

By Vikash Chandra PandeyEdited By: vyas Chandra
Published: Sun, 25 Jan 2026 03:33 PM (IST)

Bihar Politics: लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव को राजद का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि वे स्वयं 2028 ...और पढ़ें

कार्यकारी अध्‍यक्ष बनने के बाद प‍िता लालू प्रसाद का चरण स्‍पर्श करते तेजस्‍वी यादव। सौ-एक्‍स

कार्यकारी अध्‍यक्ष बनने के बाद प‍िता लालू प्रसाद का चरण स्‍पर्श करते तेजस्‍वी यादव। सौ-एक्‍स

HighLights

  1. लालू यादव के स्वास्थ्य और उम्र का दबाव।

  2. तेजस्वी यादव को पार्टी की पूर्ण कमान।

  3. लैंड फॉर जॉब केस का राजनीतिक प्रभाव।

राज्य ब्यूरो, पटना। Bihar News: बिहार की राजनीति में 25 जनवरी एक अहम मोड़ के रूप में दर्ज हो गया। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया गया। 

पार्टी के संस्थापक और सामाजिक न्याय की राजनीति के सबसे बड़े चेहरा लालू प्रसाद यादव ने अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया।

हालांकि, राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर लालू प्रसाद यादव बने रहेंगे और उनका कार्यकाल 2028 तक है। तेजस्वी यादव पहले भी व्यवहारिक तौर पर पार्टी की कमान संभाल रहे थे, लेकिन अब उनके फैसले आधिकारिक रूप से प्रभावी होंगे।

यह फैसला केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि बिहार की बदलती सियासत, पारिवारिक संतुलन और आने वाले चुनावी समीकरणों से भी गहराई से जुड़ा है। इसके मायने 5 बिंदुओं में समझिए:-

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लालू का स्वास्थ्य और उम्र का दबाव

लालू प्रसाद यादव लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट और लगातार इलाज के चलते उनके लिए रोजमर्रा की संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाना कठिन हो गया है। ऐसे में सक्रिय भूमिका तेजस्वी को सौंपना एक व्यावहारिक निर्णय माना जा रहा है।

तेजस्वी यादव को फुल कमान देने की तैयारी

पिछले विधानसभा चुनाव से लेकर विपक्ष के नेता की भूमिका तक तेजस्वी यादव पार्टी का मुख्य चेहरा बन चुके हैं। महागठबंधन की राजनीति में भी वही आगे रहे हैं। कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर अब उनके नेतृत्व पर पार्टी की औपचारिक मुहर लग गई है।

लैंड फॉर जॉब केस का राजनीतिक असर

लालू परिवार पर चल रहे लैंड फॉर जॉब मामले ने भी इस फैसले की पृष्ठभूमि तैयार की है। कानूनी मोर्चे पर लालू यादव को अपेक्षाकृत पीछे रहकर रणनीतिक भूमिका में रखने और संगठन की सक्रिय कमान तेजस्वी को देने की जरूरत महसूस की गई।

रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप यादव का संतुलन

रोहिणी आचार्य और बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की बेरुखी लालू परिवार और पार्टी के लिए असहज स्‍थ‍ित‍ि पैदा कर रही थी। पहले तेज प्रताप को बाहर का रास्‍ता दिखाया गया तो उन्‍होंने अपनी नई पार्टी बनाकर विरोध का बिगुल फूंक दिया। 

इधर रोहिणी आचार्य भी तेजस्‍वी से नाखुश हैं। समय-समय पर वे अपनी नाराजगी जाहिर भी करती रहती हैं। ऐसे में तेजस्वी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पारिवारिक और संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश भी दिखती है।

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सामाजिक न्याय की राजनीति को नया चेहरा

राजद की मूल विचारधारा सामाजिक न्याय रही है, लेकिन बदलते दौर में युवाओं और नए वोटर वर्ग तक पहुंचने के लिए नए नेतृत्व की जरूरत थी। तेजस्वी यादव उसी बदलाव का प्रतीक बनकर सामने आए हैं।

कुल मिलाकर, लालू यादव का अध्यक्ष पद छोड़ना राजद के लिए एक युग का अंत और नए राजनीतिक दौर की शुरुआत माना जा रहा है।