पटना [स्‍टेट ब्‍यूरो]। राजद ने फिलहाल सवर्णों के आरक्षण वाले मुद्दे को टाल दिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने मंगलवार को कहा कि पहले केंद्र जातिगत जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक करे। इसके बाद यह देखा जाएगा कि किस जाति के लोग किस स्थिति में हैं। इसके बाद ही सवर्ण आरक्षण पर राजद का स्टैैंड तय होगा। वैसे भी संविधान की यह भावना नहीं है कि आरक्षण का लाभ आर्थिक स्तर को ध्यान में रख मिले। तेजस्‍वी मंगलवार को राजद के सभी पदाधिकारियों, सांसदों व विधायकों, पूर्व सांसदों व विधायकों की बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब थे।

बैठक के बाद उन्होंने कहा कि एससी-एसटी उत्पीडऩ एक्ट के बहाने भाजपा और आरएसएस दलित और पिछड़ों को लड़ाना चाहती है। इस मुद्दे के विरोध में बुलाया गया भारत बंद भाजपा और आरएसएस द्वारा प्रायोजित किया गया था।
राजद की बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा
इसके पहले मंगलवार को राजद की बैठक में बूथ स्तर तक संगठन के विस्तार और एससी-एसटी उत्पीडऩ कानून को ले केंद्र सरकार के स्टैैंड पर चर्चा हुई। राबड़ी देवी की अध्‍यक्षता में उनके आवास पर हुई इस बैठक में लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करने के साथ ही गठबंधन पर भी चर्चा की गई।
बैठक में राबड़ी देवी ने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं। देश में पूरा महागठबंधन तैयार है। सभी विपक्षी दल एकजुट हैं।
तेजस्‍वी बोले: आरक्षण समाप्‍त करना चाहता केंद्र
राजद की बैठक में तेजस्वी यादव ने कहा कि लालू प्रसाद जी को जल्द न्याय मिलेगा। एससी-एसटी एक्ट से कोई छेडछाड़ न हो, सवर्णों का भारत बंद भाजपा-आरएसएस का एजेंडा था। एससी-एसटी एक्ट को 9वीं अनुसूची से दूर रखा गया। केंद्र सरकार आरक्षण को चतुराई से समाप्त करना चाहती है। पिछड़ा-दलितों में फूट डालने की कोशिश हो रही है।
बता दें कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) आर्थिक आधार पर गरीब सवर्णों के आरक्षण को लेकर फिर से दुविधा में है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने गरीब सवर्णों के लिए 10 फीसद आरक्षण का पक्ष लिया था। बदले हालात में आरक्षण एवं एससी-एसटी एक्ट के मसले पर केंद्र सरकार की किरकिरी का अनुमान लगाते हुए राजद लोकसभा चुनाव में भाजपा को घेरने के लिए इसे मुद्दा बनाने के पक्ष में तो है किंतु साथ ही इसे बर्रे का छत्ता भी मान रहा है। 

सबको साथ लेकर चलने के पक्ष में तेजस्वी
नेता प्रतिपक्ष को अहसास है कि वोटों के लिहाज से सवर्णों की आबादी भले ही कम है, लेकिन जन मानस को प्रभावित करने और सियासी लहर बनाने में इसकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यही कारण है कि राजद का नया नेतृत्व सबको साथ लेकर चलने के पक्ष में है। तेजस्वी ने आबादी के हिसाब से भागीदारी देने का बयान भी दे चुके हैं। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान लालू प्रसाद भी जनसभाओं में गरीब सवर्णों को 10 फीसद आरक्षण देने की बात करते रहे थे। 

Posted By: Kajal Kumari