पटना [अरविंद शर्मा]। राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बीमारी ने पार्टी में तेजस्वी यादव का कद बढ़ा दिया है। पार्टी में उन्होंने लालू की जगह ले ली है। बेंगलुरु में कांग्रेस-जदएस की नई सरकार के शपथ समारोह में बुलाए जाने और बड़े नेताओं के साथ मंच साझा करने से तेजस्वी की स्वीकार्यता विपक्षी दलों व महागठबंधन में भी बढ़ गई है। बिहार में प्रतिद्वंद्वी दलों के नेता भी अब मानने लगे हैं कि राजद में तेजस्वी ही सबसे बड़ा नेता हैं। नेता प्रतिपक्ष और मुख्‍यमंत्री प्रत्याशी बनाने के वक्त भले ही पार्टी में कुछ लोग असहज महसूस कर रहे थे, लेकिन अब सबकुछ सहज और साफ हो गया है।

सुशील मोदी ने भी बदला टारगेट

बिहार में भाजपा के सबसे बड़े नेता एवं उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी का टारगेट बदल गया है। सुशील मोदी पहले लालू प्रसाद यादव को टारगेट करते थे, किंतु अब उनके हमले की धार तेजस्वी की तरफ मुड़ गई है। इधर कुछ दिनों से मीडिया में जारी अपने बयानों में वे लालू परिवार के बदले तेजस्वी का जिक्र करने लगे हैं।

तेजस्‍वी की बढ़ी सियासी प्रासंगिकता

बयानों में लालू प्रसाद को नजरअंदाज करने की वजह चाहे जो हो, लेकिन सुशील मोदी के बयान साबित करते हैं कि तेजस्वी की सियासी प्रासंगिकता पहले की तुलना में बढ़ गई है। खेमा बदलकर राजग से महागठबंधन की डोर थामने वाले पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी दो दिन पहले स्वीकार किया है कि तेजस्वी उनसे बड़े नेता हैं। कितने बड़े हैं, यह तो समय बताएगा, लेकिन सियासी दोस्तों और दुश्मनों का आकलन तेजस्वी के समर्थकों को सुकून दे सकता है।

पार्टी-परिवार में प्रथम

चारा घोटाले में लालू के जेल जाने के बाद से तेजस्वी ने परिवार और पार्टी में पिता की जगह पूरी तरह ले ली है। पार्टी में सारे पदों से तेजस्वी अपने पिता की तरह पहले ही बड़े हो चुके थे। अब परिवार में भी सबसे ऊपर जगह बना ली है। पिता की अनुपस्थिति में बड़े भाई तेज प्रताप यादव की शादी की पूरी जिम्मेदारी उठाई-निभाई। लालू तो शादी के महज एक दिन पहले रस्म निभाने भर के लिए जमानत पर छूट कर आ सके थे।

महागठबंधन सरकार में डिप्टी सीएम बनने एवं सरकार से बेदखल होने पर नेता प्रतिपक्ष से लेकर मुख्‍यमंत्री प्रत्याशी बनाए जाने तक भले ही राजद के कुछ वरिष्ठ नेता असहज महसूस कर रहे थे, लेकिन अब सब कुछ सहज और साफ हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी प्रत्यक्ष तौर पर राजद विधानमंडल दल की नेता जरूर हैं, किंतु पार्टी में उनकी भूमिका मार्गदर्शक भर की रह गई है। रणनीतियों से चुनौतियों तक पार्टी का सारा दारोमदार तेजस्वी पर ही है।

विपक्षी खेमे ने स्वीकारा 
बेंगलुरु में कांग्रेस-जदएस की नई सरकार के शपथ समारोह में बुलाए जाने और बड़े नेताओं के साथ मंच साझा करने से तेजस्वी की स्वीकार्यता विपक्षी दलों में भी बढ़ गई है। बंगलुरु में मंच पर कांग्रेस की सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उत्‍तर प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव एवं मायावती समेत देश भर के कई बड़े कद-पद एवं प्रभाव वाले नेताओं के साथ तेजस्वी ने बिहार से बाहर सार्वजनिक तौर पर पहली बार मंच साझा किया। एचडी कुमारस्वामी सरकार के शपथ समारोह में बिहार से शिरकत करने वाले नेताओं में तेजस्वी अकेले थे।

Posted By: Amit Alok

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस