पटना [जेएनएन]। शिक्षक दिवस के मौके पर बिहार के शिक्षकों ने काला बिल्ला लगाकर काम किया और सरकार की नीतियों का विरोध किया। यह फैसला बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने लिया था।

बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सह विधान पार्षद केदार नाथ पांडेय एवं महासचिव सह पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बताया कि पांच सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर एक तरफ केंद्र एवं राज्य सरकारों ने  महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली  राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित कर सम्मान प्रदान किया, वहीं दूसरी ओर उसी दिन शिक्षकों के सम्मान, संवैधानिक अधिकार एवं हक छीनने के लिए उच्चतम न्यायालय में भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल को शिक्षकों के विरोध में खड़ा किया। इससे बड़ा दुर्भाग्य शिक्षकों के लिए क्या हो सकता है?

उन्होंने कहा पटना हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन और डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय ने राज्य के नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन देने का निर्णय देकर पूरे शिक्षक समाज को सम्मानित किया था। मगर, सरकार शिक्षकों के सम्मान व अधिकार को छीनने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में लगातार अतार्किक, बेबुनियाद और गलत आंकड़े पेश कर रही है। सरकार के दोहरे चरित्र व दिखावटी शिक्षक प्रेम के खिलाफ संघर्ष के लिए शिक्षकों ने काला बिल्ला बांधकर काम करने का निर्णय लिया।

Posted By: Amit Alok