पटना, राज्य ब्यूरो। Sushant Singh Rajput Case: अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत कर मौत के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया। कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआइ के हवाले की दी। लेकिन इसके पहले पटना में दर्ज एफआइआर के आधार पर जांच करने मुंबई गई बिहार पुलिस की टीम को कई दुश्वारियां झेलनी पड़ी थींं। पुलिस के अधिकारी मो. कैसर, मनोरंजन भारती, निशांत और दुर्गेश की 10 दिन खूब फजीहत हुई थी। एसपी विनय तिवारी को तो जबरन पांच दिनों तक होम क्वारंटाइन में भी रहना पड़ा था। पहली टीम 28 जुलाई को मुंबई गई थी। वहीं, पटना के एसपी विनय तिवारी को दो अगस्त को मुंबई भेजा गया था। विनय पांच दिन मुंबई में क्वारंटाइन रहने के बाद छह अगस्त को पटना लौटे थे। इस दौरान एसपी को होम क्वारंटाइन से मुक्त कराने के लिए बिहार सरकार के साथ-साथ डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों ने बिहार के अपर मुख्य सचिव गृह आमिर सुबहानी से फोन पर भी बात करने से इनकार कर दिया था। इसी तरह महाराष्ट्र के डीजीपी ने गुप्तेश्वर पांडेय के फोन और एसएमएस का जवाब नहीं दिया था।

मुंबई में छिपकर रह रहे थे पुलिस अधिकारी

पटना के राजीव नगर थाना में सुशांत के पिता केके सिंह ने एफआइआर दर्ज करायी थी। इसके बाद पटना पुलिस के चार अधिकारी जांच के लिए मुंबई भेजे गए थे। आगे जांच तेजी से पूरा करने के लिए भेजे गए एसपी विनय तिवारी को बंबई महानगर पालिका (बीएमसी) की टीम ने मुंबई एयरपोर्ट पर ही क्वारंटाइन कर दिया था। घटना के बाद पटना पुलिस की टीम ने चार दिनों तक मुंबई में छिपकर जांच की थी। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ही एसपी विनय तिवारी को क्वारंटाइन से मुक्त किया गया था।

नहीं मिली थी सुशांत की ऑटोप्सी रिपोर्ट

बिहार पुलिस के बाकी सदस्यों को क्वारंटाइन से बचने के लिए छिपना पड़ा था। बिहार पुलिस टीम को कूपर हॉस्पिटल से सुशांत की ऑटोप्सी रिपोर्ट भी नहीं दी गई थी। इसकी वजह अस्पताल प्रशासन ने मुंबई पुलिस की प्रोटोकॉल बताई थी।

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