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पटना, राज्य ब्यूरो। क्षति का आकलन और मुआवजा के लिए राज्य सरकार बाढग़्रस्त क्षेत्रों में सर्वे करा रही है। इसमें फसलों की क्षति के अलावा ध्वस्त हुए मकान और पशुओं की मौत का हिसाब लिखा जा रहा है। आपदा प्रबंधन मंत्री लक्ष्मेश्वर राय ने बताया कि सर्वे के आधार पर ही क्षति का मुआवजा दिया जाएगा। मछुआरे की नाव और मछली पकडऩे वाले जाल की क्षति की भरपाई भी की जाएगी। 

राय ने बताया कि अब तक सिर्फ मृत व्यक्तियों के परिजनों को ही मुआवजे का भुगतान मिल पाया है। अन्य तरह की क्षति का पूरा ब्यौरा उपलब्ध होने के बाद नियम के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। मछुआरों के नाव और जाल अगर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए तो मरम्मत के लिए 21 सौ रुपये दिए जाएंगे। पूर्ण क्षति की हालत में इस मद में 9600 रुपये का भुगतान होगा। इसी तरह मछली का जीरा पालने वाले किसानों की क्षति की भरपाई का निर्णय भी लिया गया है। अगर किसान ने किसी अन्य स्रोत से अनुदान हासिल नहीं किया है तो उसे प्रति हेक्टेयर 8200 की दर से भुगतान किया जाएगा। 

आपदा प्रबंधन मंत्री ने बताया कि बाढ़ में मवेशियों की मौत की खबरें आ रही हैं। सरकारी कर्मचारी मृत पशुओं की गणना में लगे हुए हैं। उनका वास्तविक आंकड़ा बाढ़ कम होने पर मिल पाएगा। दुधारू गाय-भैंस के एवज में किसानों को 30 हजार रुपया दिया जाएगा।

उन्‍होंने कहा कि घोड़ा और बैल की मृत्यु पर 25 हजार रुपया देने का प्रावधान है। बकरी के लिए तीन हजार और बछड़ा, घोड़ा और गदहा के बच्चे के लिए मुआवजे के तौर पर 16 हजार रुपये दिए जाएंगे। मंत्री ने दावा किया कि बाढ़ के चलते क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कर उसे वाहन चलने के योग्य बना लिया गया है। बाढ़ प्रभावित किसी भी हिस्से में सड़क यातायात बाधित नहीं है। बिजली की स्थिति भी सामन्य है।

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Posted By: Rajesh Thakur

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