पटना [राज्य ब्यूरो]। बिहार के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों के समान कार्य समान वेतन पर सर्वोच्च न्यायालय में गुरुवार को सुनवाई में जस्टिस अभय मनोहर सप्रे और उदय उमेश ललित की डबल बेंच ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि नियोजित शिक्षकों की समस्या का कोई न कोई समाधान होना चाहिए।  कोर्ट ने कहा यह न्याय नहीं है कि किसी को 70 हजार दिया जाए और किसी को 24 हजार। 

कोर्ट में नियोजित शिक्षकों के मामले में बहस की शुरुआत टीईटी संघ के वकील संजय हेगड़े ने की। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि सभी नियोजित शिक्षकों को समान वेतन मिलना चाहिए। टीईटी शिक्षक तमाम अहर्ताओं को पूरा करते हैं।

संजय हेगड़े के बाद अटॉर्नी जनरल के वेणुगोपाल ने कल अधूरी रही अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि कोर्ट ने जो पांच सवाल केंद्र सरकार से पूछे हैं उनके जवाब राज्य सरकार भी दे सकती है। बिहार सरकार ने केंद्र सरकार से कभी भी नियोजित शिक्षकों के सुधार के लिए अलग से कोई राशि की मांग नहीं की। नियोजित शिक्षकों के नियोजन में भी केंद्र सरकार का कोई हाथ नहीं है। 

इस पर जस्टिस सप्रे ने कहा कि  नियोजित और स्थायी शिक्षकों के वेतन में बहुत असमानता है। किसी को 24 हजार रुपये और किसी को 70 हजार रुपये यह तो कहीं का न्याय नहीं। कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल को यह निर्देश भी दिए हैं कि अगली सुनवाई के दौरान वह अपनी बात समाप्त करें।

अटॉर्नी जनरल का पक्ष पूरा होने के बाद आधे घंटे का समय शिक्षक संगठनों के वकीलों को दिया जाएगा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 सितंबर की तिथि तय की है। हालांकि आज पूरे दिन इस मामले की सुनवाई होनी थी, परन्तु एक अधिवक्ता के निधन की वजह से कोर्ट को भोजनावकाश के बाद स्थगित कर दिया गया। 

Posted By: Kajal Kumari