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गाड़ी चोरी की निकली, नंबर प्लेट दूसरी… फिर भी हो गई नीलामी; अब मोटरयान निरीक्षक गिरफ्तार

Published: Wed, 14 Oct 2026 04:05 PM (IST)

आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने शराब के साथ जब्त स्कॉर्पियो की गलत पहचान कर नीलामी करने के मामले में तत्कालीन ...और पढ़ें

गिरफ़्तार एमवीआइ सुनील कुमार सिंह। सौजन्य : ईओयू

गिरफ़्तार एमवीआइ सुनील कुमार सिंह। सौजन्य : ईओयू

HighLights

  1. तत्कालीन मोटरयान निरीक्षक सुनील कुमार सिंह गिरफ्तार।

  2. शराब के साथ जब्त स्कॉर्पियो की गलत नीलामी।

  3. बिना भौतिक सत्यापन मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की गई।

राज्य ब्यूरो, पटना। शराब के साथ जब्त स्कॉर्पियो की गलत पहचान कर नीलामी किए जाने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने तत्कालीन मोटरयान निरीक्षक सुनील कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। वह वर्तमान में गयाजी में पदस्थापित थे। ईओयू के अनुसार, पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेजा जा रहा है।

जांच में आरोप है कि सुनील कुमार सिंह ने नीलामी से पहले वाहन का भौतिक सत्यापन किए बिना मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की थी।

रिपोर्ट में रजिस्ट्रेशन नंबर और न्यूनतम मूल्य का उल्लेख किया गया, लेकिन इंजन और चेचिस नंबर दर्ज नहीं किए गए। इससे वाहन की वास्तविक पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी।

340 लीटर शराब के साथ जब्त हुई थी स्कॉर्पियो

ईओयू के अनुसार, गोपालगंज जिले के सिधवलिया थाना क्षेत्र में 19 जून 2020 को करीब 340 लीटर शराब के साथ एक स्कॉर्पियो जब्त की गई थी। इस संबंध में सिधवलिया थाना कांड संख्या 125/2020 दर्ज किया गया था।

जब्ती के समय गाड़ी पर BR06PD9070 नंबर की प्लेट लगी थी। हालांकि, इंजन और चेचिस नंबर के आधार पर वाहन का वास्तविक रजिस्ट्रेशन नंबर JH01CJ7840 पाया गया। इसी पहचान के अंतर के कारण वाहन की नीलामी पर सवाल खड़े हुए।

झारखंड के मालिक ने दर्ज कराई थी चोरी की प्राथमिकी

यह स्कॉर्पियो झारखंड निवासी राधेश्याम सिंह की थी। उन्होंने वाहन चोरी होने के संबंध में रोहतास जिले के दिनारा थाने में 27 दिसंबर 2019 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद वाहन को BR06PD9070 नंबर का मानकर जब्त करने के बाद अधिग्रहित कर नीलाम कर दिया गया।

इस कार्रवाई के कारण वास्तविक मालिक को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला। मामले में राधेश्याम सिंह की याचिका पर पटना हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में 20 नवंबर 2025 को ईओयू थाना कांड संख्या 42/2025 दर्ज किया गया था।

दारोगा समेत तीन आरोपी पहले ही गिरफ्तार

इस मामले में इससे पहले तत्कालीन अनुसंधानकर्ता दारोगा राजेंद्र राम को आठ अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, जिला परिवहन कार्यालय के तत्कालीन लिपिक कन्हैया लाल और डाटा एंट्री ऑपरेटर हैदर अली अंसारी को 14 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।

ईओयू अब मामले में अन्य आरोपितों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच का केंद्र यह है कि वाहन की वास्तविक पहचान सामने आए बिना उसकी नीलामी की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।