नीरज कुमार, पटना। अयोध्या की विवादित बाबरी मस्जिद के मध्य गुंबद के नीचे ही भगवान श्रीराम का जन्मस्थान है। यह विभिन्न दस्तावेजों से स्पष्ट हो चुका है। इन दस्तावेजों को सुप्रीम कोर्ट में भी जमा किया गया है, जिसके आधार पर कोर्ट नवंबर में फैसला देने वाला है। सुप्रीम कोर्ट बार-बार जन्मस्थान का प्रमाण मांग रहा था। ये बातें मंगलवार को दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में अवकाशप्राप्त आइपीएस अधिकारी एवं महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने कहीं।

: आस्ट्रिया के फादर जोसेफ की पुस्तक में है जन्मस्थान की चर्चा :

आचार्य कुणाल का कहना है कि आस्ट्रिया से आए ईसाई पुरोहित फादर जोसेफ टिफेनथेलर की लिखित पुस्तक डिस्क्रप्टो इंडिया में श्रीराम के जन्म स्थान की चर्चा की गई है। इस पुस्तक का प्रकाशन 1767 में किया गया था। उन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा है कि मस्जिद के अंदर ब्लैक ग्रेनाइट की एक वेदी बनी हुई थी, जिसकी हिन्दू लोग तीन बार परिक्रमा करते थे। वेदी वर्गाकार है। यह 18 फीट 9 इंच लंबी, 15 फीट चौड़ी एवं 5 इंच ऊंची है। : जन्मस्थान के बारे में मुआजीन ने लिखा था थानेदार को पत्र :

आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि श्रीराम के जन्मस्थान को लेकर मस्जिद के मुआजीन सैयद मोहम्मद खतीब ने अयोध्या के तत्कालीन थानेदार शीतल दूबे को 30 नवंबर 1858 को एक पत्र लिखा था। उसमें इस बात का उल्लेख किया गया है कि पंजाब से आए 25 निहंग (सशस्त्र) सिखों ने मस्जिद पर कब्जा कर लिया। मस्जिद के अंदर हवन भी किया और दीवार पर राम-राम लिख दिया। साथ ही यह भी लिखा गया है कि जिस जगह पर सिखों ने पूजा की है वह मस्जिद के बीच में है, जिसे हिन्दू लोग जन्मस्थान बताते हैं। यह दस्तावेज मुस्लिम पक्ष ने ही सुप्रीम कोर्ट में जमा किया है। : बुकानन की सर्वे रिपोर्ट में भी जन्मस्थान की चर्चा :

1810-14 के बीच अयोध्या का सर्वे करने वाले अधिकारी बुकानन ने भी अपनी रिपोर्ट में अयोध्या में मस्जिद के तीन गुंबदों के बीच श्रीराम के जन्म स्थान होने की चर्चा की है। यह रिपोर्ट अभी भी लंदन की ब्रिटिश लाइब्रेरी में पड़ी है। यह रिपोर्ट आज तक प्रकाशित नहीं की जा सकी है। जबकि बुकानन की पटना की सर्वे रिपोर्ट प्रकाशित कर दी गई है। बुकानन को दुनिया के महान सर्वेयर के रूप में जाना जाता है। भारत में पहली बार उसे कर्नाटक की सर्वे रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। रिपोर्ट काफी बेहतर तैयार हुई थी, उसी के आधार पर देश के कई शहरों की सर्वे रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा उन्हें सौंपा गया था।

: भारत की पांडुलिपियां सबसे बड़ी साक्ष्य :

आचार्य कुणाल का कहना है कि भगवान श्रीराम के जन्मस्थान का वर्णन भारत की कई पांडुलिपियों में किया गया है। इनमें इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि 'सीता कूप' एवं 'सीता रसोई' के बीच श्रीराम का जन्मस्थान था। सीता कूप आज भी मौजूद है।

: कोर्ट के आधार पर तैयार किया गया था नक्शा :

आचार्य कुणाल का कहना है कि अयोध्या के स्थानीय कोर्ट ने 1950 में एक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया था। कोर्ट के निर्देश पर शिवशंकर लाल ने इसे तैयार किया था। साथ ही उन्होंने श्रीराम के जन्मस्थान को केंद्र में रखकर एक नक्शा भी तैयार किया था। इसे 14 मार्च 2018 को ही कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।

Posted By: Jagran

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