यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 19, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बिहार में प्रशासन की एक चूक और क्वारंटाइन सेंटर में जिंदा प्रवासियों ने ओढ़ लिया कफन, जानें क्यों
बिहार के छपरा में जीते जी इंसान को कफन ओढ़ना पड़ा है। ये सब हुआ है प्रशासन की बदइंतजामी से। ...और पढ़ें

सारण, जेएनएन। कोरोना काल में प्रवासियों को तेज धूप में पैदल चलते, पैरों में छाले पड़ते और भूख-प्यास से बिलबिलाते आपने देखा होगा, परंतु जीते जी इंसान को कफन ओढ़कर सोना पड़े तो यह आश्चर्य है। बिहार में तो ऐसी ही घटना सामने आई है।
पता चला तो गेट पर फेंका कफन
छपरा जिले में इसुआपुर के शामकौड़िया उच्च विद्यालय के क्वारंटाइन सेंटर में प्रवासियों को चादर के बदले कफन वाला कपड़ा ओढ़ने को दे दिया गया। प्रवासियों ने उसे विद्यालय के गेट पर फेंक दिया। सब अब घर से चादर मंगाकर सो रहे हैं। डीएम ने मामले की जांच बैठा दी है।
एक तरफ से सबने ओढ़ ली कफन वाली चादरें
प्रवासी अरविंद प्रसाद ने बताया कि शुक्रवार को भोर में वे क्वारंटाइन सेंटर पहुंचे। वहां सब को कफन वाली चादरें ओढ़े देखा तो होश उड़ गए। मालूम हुआ कि सभी को ओढ़ने के लिए यही दिया गया है। प्रवासियों को आभास हुआ कि ये चादर नहीं है, तो सभी ने उसे फेंक दिया।
रातभर कफन ओढ़ के ही रहे सोते, नहीं चला पता
पंजाब से हफ्ते भर का सफर तय कर गांव पहुंचे बसावन महतो ने बताया कि कफन ओढ़कर रात में सोए थे। मधेश्वर कुमार ने कहा कि क्वारंटाइन सेंटर पर जो सुविधाएं मिल रही हैं उसका वरीय अधिकारी जायजा लेते तब न समझ में आता।
जिलाधिकारी ने कहा मामला गंभीर, जांच करेंगे एडीएम
पंजाब से आए प्रवासी मधेश्वर मास्क भी नहीं मिल पाया है तो बाकी चीजों का क्या होगा। मधेश्वर की तरह ही छपरा के क्वारंटाइन सेंटर की दास्तान कई लोगों ने बताई। फिलहाल सूचना मिलने पर जिले के डीएम सुब्रत कुमार सेन ने कहा कि मामला गंभीर है। घटना की गंभीरता को समझते हुए जिलाधिकारी ने इसकी जांच एडीएम को सौंप दी है और क्वारंटाइन सेंटर में रहने वाले श्रमिकों की चादरें बदल दी गई हैं।
