पटना [जेएनएन]। नवादा के नारदीगंज इलाके में स्थित सूर्यमंदिर द्वापरकालीन है, जिसे हंडिया सूर्यमंदिर के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर के प्रांगण में स्थित सरोवर में स्नान करने से कुष्ठ रोग से छुटकारा मिल जाता है। मंदिर और उसके आसपास पुरातात्विक महत्व की कई चीजे हैं, जो मंदिर की गौरवशाली अतीत को बयां करती हैं। यहां सूर्यनारायण की दुर्लभ मूर्ति भी है।

 

श्रद्धालु इसके सरोवर मेें स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं। हड़िया सूर्यमंदिर कुष्ठ से मुक्ति के लिए जाना जाता है। श्रद्धालुओं में आस्था है कि सरोवर में पांच रविवार स्नान करने से असाध्य कुष्ठ रोग से भी लोगों को छुटकारा मिल जाता है। छठ के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

 

श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब ने बनवाया था मंदिर

पौराणिक धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब को उनकी गलतियों के कारण श्रीकृष्ण ने श्राप दे दिया था, जिसके बाद साम्ब कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गए थे। साम्ब ने जब श्रीकृष्ण से मुक्ति के लिए प्रार्थना किया तब उन्हें बारह सूर्यमंदिरों का निर्माण कराने को कहा गया था। ऐसा माना जाता है कि साम्ब द्वारा निर्मित विभिन्न सूर्यमंदिरों में से हड़िया सूर्यमंदिर भी एक है।

 

यहां स्थित है हड़िया

गया और नालंदा जिले की सीमा पर हड़िया अवस्थित है। यह राजगीर से पांच किलोमीटर और नवादा से 31 किलोमीटर की दूरी पर है। वरिष्ठ साहित्यकार रामरतन प्रसाद सिंह रत्नाकर कहते हैं यह श्रीकृष्ण के प्रभाव वाला इलाका रहा है। मगध सम्राट जरासंध का मुख्यालय राजगीर था। हड़िया के आसपास बड़गांव समेत कई प्रमुख सूर्यमंदिर है। मगध सम्राट जरासंध की पुत्री धन्यावती भी राजगीर से हड़िया आती थी।

 

 

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