पटना, जागरण संवाददाता। शहर के गोलघर स्थित श्रीश्री अखंडवासिनी गोलघर मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। आम दिनों के अपेक्षा नवरात्र के मौके पर श्रद्धालुओं की खूब भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ती है। मां दुर्गा अखंडवासिनी माता के रुप में विराजमान है। बीते 108 वर्षो से मंदिर में घी और तेल का अखंड दीपक लगातार जल रहा है। यहां आने वाले भक्तों की सारी मनोकामना मां दुर्गा पूर्ण करती हैं। 

मंदिर की विशेषता 

मंदिर परिसर में मां काली की प्रतिमा के साथ माता बगलामुखी की प्रतिमा भी है। यह पटना के शक्तिस्थल के रूप में से एक है। मंदिर के पुजारी व पूजा समिति के अध्यक्ष विशाल तिवारी ने बताया कि यहां पर भक्त सात हल्दी, नौ लाल फूल, सिंदूर मां को अर्पित कर अपनी मनोकामना पूर्ण करते हैं। यहां हर दिन तीनों पहर मां की आरती की जाती है। प्रत्येक मंगलवार को यहां पर भक्तों की भीड़ खूब उमड़ती है। नवरात्र के दौरान सप्तमी, अष्टमी व नवमी तिथि को काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। 

(अखंडवासिनी मंदिर के पुजारी विशाल तिवारी।)

मंदिर का इतिहास 

मंदिर के पुजारी  विशाल तिवारी बताते हैं कि पटना का यह पहला मंदिर होगा जहां तीन पीढ़ियों से एक ही परिवार के लोग मां की सेवा में लगे हैं। पुजारी विशाल तिवारी बताते हैं कि आमी स्थान निवासी हमारे दादा आयुर्वेदाचार्य डा. विश्वनाथ तिवारी ने 1914 में  अखंड दीपक को शक्तिपीठ कामाख्या मंदिर से ज्योत जला कर पटना लाए थे। कामाख्या से काफी मुश्किलों का सामना करते हुए ज्योत को पटना लाया गया था। उस समय से अखंडवासिनी मंदिर में दो अखंड दीप निरंतर जल रहा है। यहां पर एक घी और दूसरा सरसों के तेल का दीपक अनवरत जल रहा है। वहीं  बीते 30 वर्षो से 51 लोगों का मंदिर में अपना अखंड दीप लगातार जल रहा है। 

ऐसे पहुंचे मंदिर 

अखंडवासिनी मंदिर पहुंचने के लिए गांधी मैदान से सड़क मार्ग होते हुए गोलघर उतर कर मंदिर पहुंचते हैं। दानापुर से सड़क मार्ग होते हुए गोलघर उतर कर यहां पहुंचा जा सकता है। 

माता को अर्पित करते हैं ये चीज

अखंड वासिनी मंदिर के व्यवस्थापक व पुजारी विशाल तिवारी का कहना है कि यहां पर जो भी भक्त सच्चे मन से अपनी मनोकामना लेकर आते हैं मां उसकी मनोकामना जरूर पूरी करती है। यहां आने वाले भक्त उड़हूल के फूल, सात खरी हल्दी, सिंदूर मां को समर्पित करते हैं। यहां पर मां काली और बगलामुखी माता की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ की जाती है। नवरात्र के मौके पर भक्तों का उत्साह देखते बनता है। वहीं अखंड वासिनी मंदिर, पूजा समिति के सदस्य राजेश राठौर का कहना है कि प्रतिवर्ष नवमी के दिन विशाल भंडारा का आयोजन होता है। इस वर्ष भी भंडारे का आयोजन होगा। भंडारे में श्रद्धालुओं को सात्विक भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण कराया जाता है। नवरात्र के दौरान पूजा अर्चना में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो इसका ध्यान मंदिर प्रबंधन की ओर से रखा जाता है। 

Edited By: Rahul Kumar

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