फार्मासिस्ट भर्ती में डिप्लोमा जरूरी, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के नियमों को ठहराया वैध
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में फार्मासिस्ट भर्ती के लिए डिप्लोमा इन फार्मेसी को अनिवार्य योग्यता बनाए रखने के राज्य सरकार के फैसले को वैध ठहराया है।

फार्मासिस्ट भर्ती में डिप्लोमा जरूरी, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के नियमों को ठहराया वैध

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विधि संवाददाता, पटना। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में फार्मासिस्ट भर्ती को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि डिप्लोमा इन फार्मेसी को अनिवार्य योग्यता बनाए रखना पूरी तरह वैध है।
न्यायालय ने बिहार फार्मासिस्ट कैडर नियमावली, 2014 (संशोधित 2024) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए बी.फार्मा और एम.फार्मा डिग्रीधारियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंद्रेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों की भर्ती के लिए आवश्यक योग्यता तय करने का अधिकार है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फार्मेसी एक्ट, 1948 और उससे संबंधित विनियम केवल पेशे के नियमन तक सीमित हैं, जबकि सरकारी नियुक्ति का क्षेत्र राज्य की नीति के अंतर्गत आता है।
इस मामले में पटना हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 10 अप्रैल 2025 को अपने आदेश में पहले ही नियमों की वैधता को सही ठहराया था।
हाई कोर्ट ने माना था कि डिप्लोमा को न्यूनतम योग्यता बनाना न तो मनमाना है और न ही भेदभावपूर्ण। सुप्रीम कोर्ट ने उसी निर्णय को बरकरार रखते हुए अपीलों को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि बी.फार्मा/एम.फार्मा उच्च योग्यता है, इसलिए उन्हें भी भर्ती में शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने माना कि डिप्लोमा और डिग्री दोनों अलग-अलग प्रकृति की योग्यताएं हैं और डिप्लोमा धारकों को अस्पताल आधारित कार्यों के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त होता है।
कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि डिग्रीधारियों के लिए अन्य रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं, जबकि डिप्लोमा धारकों के विकल्प सीमित होते हैं। ऐसे में राज्य द्वारा डिप्लोमा को प्राथमिक योग्यता बनाना न तो मनमाना है और न ही संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन।
