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पटना [जागरण टीम]। मुजफ्फरपुर के चर्चित बालिका गृह सामूहिक दुष्‍कर्म मामले में पीडि़त लड़कियों के पुनर्वास को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला दिया। कोर्ट ने आठ  लड़कियों को उनके परिजनों को सौंपने तथा सभी पीडि़त लड़कियों को मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके पहले बुधवार को मास्‍टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब विशेष कोर्ट में उसकी पहचान अधिकांश पीडि़त लड़कियों ने की।
विदित हो कि टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS) ने सुप्रीम कोर्ट में 20 पीड़ित लड़कियों के पुर्नवास को लेकर रिपोर्ट दाखिल की है, जिसके अनुसार आठ लड़कियाें को उनके घर भेजा जा सकता है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार व राज्‍य की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से गुरुवार को अपना पक्ष रखने को कहा था। इसके पहले बीते जुलाई में मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिस को बालिका गृह में यातना सहने वाली सभी 44 लड़कियों के पुनर्वास की योजना बनाने का आदेश देते हुए चार हफ्ते में रिपोर्ट मांगा था। कोर्ट ने सभी लड़कियों के लिए अलग-अलग पुनर्वास का प्लान बनाने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में सभी 44 में से आठ लड़कियों को उनके परिवार वालों को सौंपने का आदेश दिया। साथ ही बिहार सरकार को सभी पीडि़त लड़कियों को प्रावधानों के अतर्गत आर्थिक सहायता देने का भी आदेश दिया।

स्‍पेशल कोर्ट में लड़कियों ने आरोपितों को पहचाना
इस बीच बुधवार को स्‍पेशल कोर्ट में पीडि़त लड़कियों ने मामले के आरोपितों को पहचान लिया। इनमें मास्‍टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर भी शामिल था।
स्‍पेशल कोर्ट में गवाही के दौरान लाए गए आरोपित
बुधवार को स्‍पेशल कोर्ट में गवाही के दौरान आरोपितों को लाया गया। आरोपितों में ब्रजेश ठाकुर के अलावा बाल संरक्षण इकाई की तत्कालीन सहायक निदेशक रोजी रानी, बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रोशन, बालिका गृह की कर्मचारी किरण कुमारी, मीनू देवी, हेमा मसीह, चंदा देवी, रामाशंकर सिंह उर्फ मास्टर साहेब उर्फ मास्टर जी व रामानुज ठाकुर सहित अन्य शामिल हैं। नई दिल्ली के साकेत स्थित विशेष कोर्ट पॉक्सो ने अपनी प्रश्नावली में आरोपितों से जबाव देने को कहा है।
फैसले के निकट पहुंच रहा मामला
बालिका गृह मामले में सत्र-विचारण की कई कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। डॉ. अश्विनी उर्फ आसमनी के अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने बताया कि बचाव पक्ष को साक्ष्य पेश करने का विशेष कोर्ट ने आदेश दिया है। इसकी तैयारी चल रही है।

यह है मामला
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टिस) की रिपोर्ट के आधार पर बाल संरक्षण इकाई के तत्कालीन सहायक निदेशक दिवेश कुमार शर्मा ने पिछले साल 31 मई को महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। टिस की रिपोर्ट में बालिका गृह में लड़कियों के साथ यौन हिंसा की बात कही गई थी। महिला थाना पुलिस ने पिछले साल दो जून को ब्रजेश ठाकुर, चंदा देवी, किरण कुमारी, नेहा कुमारी, मंजू देवी, इंदू कुमारी, हेमा मसीह, मीनू देवी को गिरफ्तार किया था। इन सभी को पिछले साल तीन जून को मुजफ्फरपुर के विशेष कोर्ट के समक्ष पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। बाल कल्याण समिति के तत्कालीन सदस्य विकास कुमार को पिछले साल पांच जून व तत्कालीन बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रोशन को 24 जून को गिरफ्तार किया गया।

इन सभी के खिलाफ पिछले साल 26 जुलाई को विशेष कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया। बाद में सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी। पिछले साल 28 जुलाई से इस मामले की जांच सीबीआइ कर रही है। सीबीआइ ने उक्त आरोपितों के अलावा कुल 21 के विरुद्ध विशेष कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था।

Posted By: Amit Alok

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