पटना, जेएनएन। सोन नहर से सिंचित क्षेत्र के किसानों को मानसून के असामान्य वर्षापात के कारण सूखे का सामना करना पड़ रहा है। मानसून के आगमन से पहले 39.67 करोड़ की लागत से आठ प्रखंडों में 16 परंपरागत परंपरागत जलाशयों को पुनर्जीवित किया गया है, ताकि 6520 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिल सके। मिट्टी की सफाई करा दी गई है। अब वर्षा जल संचय हुआ तो सिंचाई भी होगी।


पटना जिले का क्षेत्रफल करीब 3 लाख 17 हजार 236 हेक्टेयर है। इसमें 65 फीसद हिस्सा करीब 3 लाख 1 हजार 104 हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। जिले के आठ प्रखंडों की सिंचाई सोन नहर से होती थी। सोन नहर में पानी नहीं आने के कारण यह सूखा क्षेत्र बन गया। बीते मई और जून में 53 वर्षो के बाद सर्वाधिक गर्मी के कारण इन क्षेत्रों में भू-जल स्तर 41 फीट तक नीचे सरक गया। नतीजा कुआं, चापाकल और सामान्य बोरिंग भी सूख गए।


लघु सिंचाई विभाग ने पटना सहित पूरे प्रदेश में सतही योजना के तहत जमींदारी बांध, जलाशयों का उद्धार, आहर, पइन और चेक डैम निर्माण कराया है। पटना जिले के आठ सूखा प्रभावित प्रखंडों का सतही योजना के तहत चयन किया गया। बीते 15 मार्च को जिले के पालीगंज, दुल्हिनबाजार, बिक्रम, संपतचक, मसौढ़ी, फुलवारीशरीफ, धनरूआ और बाढ़ प्रखंड में कुल 16 योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए 39.67 करोड़ रुपये की मंजूरी के साथ संवेदक से करार किया गया। तय था कि तीन माह में 15 जून तक कार्य समाप्त कर लिया जाएगा। जलाशयों में जमा मिट्टी-गाद की सफाई, पानी रोकने के लिए चेक डैम और बांध का निर्माण कराया गया। इस योजना के तहत विभाग का दावा है कि करीब 80 से 90 फीसद मिट्टी की सफाई हो गई। मानसून के आगमन के पूर्व मिट्टी सफाई से उम्मीद जगी है कि वर्षा जल का संचय होगा, जिससे खेतों की पटवन, मवेशियों और पक्षियों की प्यास भी बुझ सकेगी।

हालांकि एक पहलू यह भी है कि विभाग ने जिस तत्परता से कार्य कराया, उसके अनुरूप भुगतान नहीं मिला। पटना जिले में सतही योजना के लिए नाबार्ड से पैसे मिले हैं। विभाग ने दो किस्तों में 10-10 फीसद भुगतान ही किया है। लिहाजा योजना को अंतिम रूप देने में एजेंसी ने हाथ खड़ा कर दिया है।