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पटना के समनपुरा की दिलचस्प कहानी: 6 परिवारों ने बसाई थी बस्ती, 500 घरों में जिंदा है सामूहिकता का रिश्ता

Published: Fri, 02 Oct 2026 06:08 PM (IST)

समनपुरा, पटना, जो कभी छह किसान परिवारों की बस्ती थी, आज करोड़ों की जमीन और बहुमंजिली इमारतों वाला एक प्रमुख शहरी क्षेत्र बन गया है।

वर्षों की कहानी छिपी है समनपुरा के इस मकान में। जागरण

वर्षों की कहानी छिपी है समनपुरा के इस मकान में। जागरण

HighLights

  1. समनपुरा छह किसान परिवारों से शुरू होकर शहरी केंद्र बना।

  2. कभी खेत-खलिहान वाली जमीन अब करोड़ों की हो गई।

  3. 500 परिवारों के बीच आज भी मजबूत सामाजिक रिश्ते कायम।

सैयद नकी इमाम, फुलवारीशरीफ (पटना)। कभी चारों तरफ खेत-खलिहान और हरियाली के बीच महज छह किसान परिवारों से आबाद समनपुरा आज राजधानी पटना के प्रमुख शहरी इलाकों में शुमार है।

अनवर खान, राशिद खान, तुने खान, जुबेर खान, मुमताज खान और सिराज खान के परिवारों से शुरू हुई इस बस्ती का विस्तार आज करीब 500 परिवारों तक हो चुका है।

कभी जिस जमीन पर धान और गेहूं की फसल लहलहाती थी, उसी जमीन की कीमत आज करोड़ों रुपये में पहुंच चुकी है। इन छह परिवारों का मुख्य पेशा खेती और पशुपालन था।

खेती-बाड़ी पर निर्भर थी आजीविका 

खेतों के बीच बसे इन परिवारों की जिंदगी पूरी तरह कृषि पर निर्भर थी। सोना खान के परिवार के 70 वर्षीय अनवर उल्ला खान बताते हैं कि उनका जन्म करीब 70 वर्ष पहले समनपुरा में ही हुआ था।

तब घर के चारों ओर खेत-खलिहान थे। समनपुरा की चौहद्दी राजीवनगर नाला, हवाई अड्डा, आशियाना रोड और राजेंद्र कृषि फार्म तक फैली थी, जहां आज IGIMS का परिसर है।

उस समय यहां आने-जाने के लिए टमटम ही प्रमुख साधन था। अनवर उल्ला खान कहते हैं कि खेती के साथ घरों में गाय-बैल, बकरी और अन्य पशु-पक्षी पालना आम बात थी।

बहुमंज‍िली इमारतों से गुलजार हुआ इलाका 

आज खेत लगभग खत्म हो गए हैं और उनकी जगह बहुमंजिली इमारतों, बड़े शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों ने ले ली है। इसके बावजूद परिवार की पुरानी परंपराएं कायम हैं।

उनके घर में आज भी एक दर्जन से अधिक गाय-बकरी और अन्य पशु पाले जाते हैं तथा दूध का कारोबार होता है।
समनपुरा की आबादी भले 500 परिवारों तक पहुंच गई हो, लेकिन सामाजिक रिश्तों की डोर आज भी मजबूत है।

शादी-विवाह या किसी उत्सव में 500 परिवारों को न्योता देना परंपरा का हिस्सा है। छोटे से छोटे आयोजन में भी सामूहिक भोज होता है। खेतों से उठकर ऊंची इमारतों और बड़े संस्थानों के बीच खड़ा समनपुरा आज पटना के बदलते शहरी स्वरूप की कहानी कहता है।