'सलवार खींचना; छाती दबाना रेप की कोशिश नहीं', पटना HC की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट का आरोपी को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के उस फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें महिला की सलवार खींचने और सीने ...और पढ़ें

पटना हाई कोर्ट
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया।
हाईकोर्ट ने दुष्कर्म प्रयास के लिए कुछ कृत्यों को अपर्याप्त माना।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की आपत्तिजनक टिप्पणियों पर आरोपी को नोटिस दिया।
विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट के उस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें महिला की सलवार खींचने का प्रयास करने और उसके सीने को दबाने के कृत्य को दुष्कर्म के प्रयास के लिए पर्याप्त नहीं माना गया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने माना था कि ऐसे कृत्य महिला की लज्जा भंग करने के लिए आपराधिक बल के प्रयोग के अंतर्गत आईपीसी की धारा 354 के तत्वों को पूरा करते हैं।
हाई कोर्ट की कुछ टिप्पणियों को बताया आपत्तिजनक
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों को “आपत्तिजनक” बताते हुए आरोपी को नोटिस जारी किया है। सीजेआई सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में कुछ ऐसी टिप्पणियां हैं, जिन पर विचार की आवश्यकता है।
आरोपी का पक्ष सुनने के बाद होगा विचार
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी का पक्ष सुनने के बाद इन टिप्पणियों को हटाने पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने बिहार के महाधिवक्ता को स्थानीय पुलिस के माध्यम से आरोपी को नोटिस की तामील सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया।
9 जुलाई 2026 को हाई कोर्ट ने सुनाया था फैसला
मामला हिमांशु कुमार पाठक उर्फ मिठिया पाठक बनाम बिहार राज्य, आपराधिक अपील संख्या 775/2013 से जुड़ा है।
पटना हाई कोर्ट की एकलपीठ ने 9 जुलाई 2026 को फैसला सुनाया था। इसमें दुष्कर्म के प्रयास और गलत तरीके से बंधक बनाने के मामले में आरोपी की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया गया था।
हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के प्रयास को लेकर क्या कहा
हाई कोर्ट ने कहा था कि केवल सलवार खींचने का प्रयास और सीने को दबाने जैसे कृत्य, जब तक दुष्कर्म करने की मंशा को स्पष्ट रूप से स्थापित करने वाला प्रत्यक्ष कृत्य सामने न हो, भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के साथ धारा 511 की परिभाषा के तहत दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं बनाते।
'टिप्पणी' हटाने पर होगा विचार
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में की गई टिप्पणियों पर विचार के लिए मामले का संज्ञान लिया है। आरोपी को नोटिस जारी किया गया है और उसका पक्ष सुनने के बाद टिप्पणियों को हटाने पर विचार किया जाएगा।
