पटना [जेएनएन]। Muzaffarpur Shelter Home Case: बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण मामले (Muzaffarpur Shelter Home Case) में दिल्ली की साकेत कोर्ट (Saket Court) को गुरुवार को फैसला सुनाना था, लेकिन यह एक बार फिर टल गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ के अवकाश पर होने के कारण ऐसा हुआ। उनकी अनुपस्थिति में कामकाज देख रहे जज  ने 14 जनवरी की तारीख मुकर्रर की है।  इसके पहले सात महीने की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। नवंबर में भी वकीलों की हड़ताल के कारण कोर्ट का फैसला एक बार टल चुका था।

सीबीआइ (CBI) ने इस मामले में ब्रजेश ठाकुर (Brajesh Thakur) को मुख्य आरोपी बनाया है। कोर्ट कल ब्रजेश ठाकुर समेत कुल 20 आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो कानून, दुष्‍कर्म आपराधिक साजिश समेत अन्य धाराओं में सजा का एलान करेगी।

सुप्रीम कोर्ट कर रहा मॉनीटरिंग

मुजफ्फरपुर के बालिका गृह की 40 लड़कियों की प्रताड़ना व दुष्कर्म से जुड़े इस बड़े मामले का खुलासा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट (Social Audit Report) से हुआ था। बाद में इसकी जांच सीबीआइ को सौंपी गई। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस मामले को बिहार से दिल्‍ली के साकेत कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। मामले की मॉनीटरिंग (Monitoring) सुप्रीम कोर्ट कर रहा है।

टिस की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

मुंबई के ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस’ (TISS) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट में बिहार के विभिन्‍न बालिका गृहों में शारीरिक प्रताड़ना व यौन शोषण के मामले का खुलासा हुआ था। 'टिस' ने यह रिपोर्ट 31 मई 2018 को राज्‍य सरकार (Bihar Government) को सौंप दी थी। इसी रिपोर्ट से मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण कांड का खुलासा हुआ था। बाद में 28 जुलाई को मुजफ्फरपुर बालिका गृह की 42 में से में से 34 लड़कियों से दुष्कर्म की पुष्टि हुई। एक लड़की ने अपने बयान में वहां एक लड़कियों की हत्या तक की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट की मॉनीटरिंग में सीबीआइ जांच

'टिस' की रिपोर्ट के आधार पर जिला बाल कल्याण संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक ने मुजफ्फरपुर महिला थाना में बालिका गृह का संचालन करने वाली स्‍वयंसेवी संस्‍था ‘सेवा संकल्प एवं विकास समिति’ के संचालकों व अन्‍य के खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी। कालक्रम में इस मामले की परतें एक-एक कर उतरती गईं। मामला सीबीआइ के हाथों में चला गया और सुप्रीम कोर्ट इसकी मॉनीटरिंग करने लगा।

साकेत कोर्ट में सात महीने चली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने बीते सात फरवरी को मामला को सुनवाई के लिए बिहार से दिल्ली के साकेत कोर्ट ट्रांसफर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को पीड़ित लड़कियों को मुजावजा देने तथा उनकी चिकित्सा व शिक्षा तथा आर्थिक मदद करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस मामले की सुनवाई साकेत कोर्ट में 23 फरवरी 2019 से चल रही थी। कोर्ट में पीड़िताों ने अपनी रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्‍तान बताई थी। सुनवाई के बाद सितंबर 2019 में कोर्ट ने सुनवाई करके अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

ये हैं इस मामले के आरोपित

इस मामले का मुख्‍य आरोपित ब्रजेश ठाकुर है। ब्रजेश सहित सभी आरोपित ये हैं- 

- ब्रजेश ठाकुर (मुख्‍य आरोपित)

- साइस्ता परवीन उर्फ मधु

- इंदु कुमारी

- मीनू देवी

- नेहा कुमारी

- हेमा मसीह

- चंदा देवी

- रोजी रानी

- मंजू देवी

- किरण कुमारी

- विकास कुमार

- गुड्डू कुमार पटेल

- दिलीप कुमार वर्मा

- रवि कुमार रोशन

- विजय कुमार तिवारी

- किशन राम उर्फ कृष्णा

- डॉ. अश्विनी उर्फ आसमानी

- विक्की

- रामानुज ठाकुर

- रामाशंकर सिंह

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