बिहार में SIR के बहाने एकजुटता की कोशिश, बांकीपुर उपचुनाव में झटका खाने के बाद वोट बैंक टटोलने में जुटा RJD
आरजेडी बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के बहाने महागठबंधन में एकजुटता लाने और अपने जनाधार को टटोलने का प्रयास कर रहा है।

वोट बैंक टटोलने में जुटा राजद
HighLights
आरजेडी SIR के बहाने महागठबंधन में एकजुटता का प्रयास कर रहा है।
बांकीपुर उपचुनाव में आरजेडी के वोट शेयर में 63.3% की गिरावट।
मुस्लिम-यादव समीकरण में सेंधमारी से आरजेडी अपने जनाधार को टटोल रहा है।
राज्य ब्यूरो, पटना। मतदाता-सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के विरुद्ध राहुल गांधी बिहार में वोटर अधिकार यात्रा पर निकले। वह पिछले वर्ष जुलाई का महीना था। उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सहित पूरे महागठबंधन की शर्मनाक पराजय हुई। तब से एनडीए के विरोध में किसी एक मुद्दे पर एकजुट संघर्ष का साहस नहीं हो सका।
साझी बैठक और रणनीति नहीं होने से महागठबंधन में खटपट की चर्चा सार्वजनिक रूप से होने लगी। घटक दलों के सुर भी उसकी पुष्टि करने लगे। ऐसे में एसआइआर के विरुद्ध आंदोलन के बहाने एक बार ऊिर एकजुटता का प्रयास है। इसी बहाने राजद अपने जनाधार को टटोलने का जतन भी करेगा, जिसमें जन सुराज पार्टी (जसुपा) घुसपैठ करने लगी है।
वोट शेयर में 63.3 प्रतिशत की भारी गिरावट
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के उप चुनाव ने राजद को स्पष्ट कर दिया कि उसके माय (मुसलमान-यादव) समीकरण में सेंधमारी होने लगी है। हालांकि, ऐसा विधानसभा चुनाव में भी हुआ था, लेकिन तब वोट-चोरी का आरोप लगाकर वह स्वयं को दिलासा देता रहा। बांकीपुर ने वह भ्रम तोड़ दिया। वहां राजद के वोट शेयर में 63.3 प्रतिशत की भारी गिरावट आई।
ऐसा मात्र मुसलमानों के किनारा करने से नहीं हुआ, बल्कि यादव मतदाताओं ने भी कन्नी काटी। संभव है कि इसका बड़ा कारण प्रशांत किशोर के प्रति चरम आकर्षण रहा हो, जिन्होंने भाजपा को उसके इस पुराने किले में धूल चटा दिया।
राजद से अधिक असदुद्दीन ओवैसी के एआईएमआईएम की कद्र
यह सत्य का एक पक्ष है। दूसरा पक्ष सीमांचल से, जहां मुसलमानों के बीच राजद से अधिक असदुद्दीन ओवैसी के एआईएमआईएम की कद्र रही। वहां कांग्रेस की स्थिति भी राजद से अच्छी ही मानी जा सकती है, जिसके प्रति कभी मुसलमानों का सहज आकर्षण था। उसी आशा में तेजस्वी को लेकर राहुल वोटर अधिकार यात्रा पर निकले थे। उसके बाद महागठबंधन, विशेषकर राजद, के हर नेता की जुबान पर मतदाता-सूची से मुसलमानों के नाम बाहर किए जाने की शिकायतें होने लगीं। हालांकि, उसका कोई साक्ष्य नहीं रहा। सर्वाधिक नाम हिंदू बहुल गोपालगंज जिला में कटे।
सारण प्रमंडल के तीन जिलों में गोपालगंज भी है, जाे बिहार में राजद के मजबूत क्षेत्रों में से एक है। वोटों के आंकड़े बताते हैं कि वहां भी राजद की जमीन खिसकी है। इससे स्पष्ट है कि राजद के साथ कोई नया वर्ग नहीं जुड़ा, जिसके लिए तेजस्वी बहुत पहले से ए-टू-जेड और माय के साथ बाप (बहुजन-आधी आबादी-पिछड़ा वर्ग) की दुहाई दे रहे थे।
एफआईआर के विरोध में सेव डेमोक्रेसी अभियान चलाया
राजद के साथ अगर कोई दूसरा वर्ग आकर्षित हुआ तो उसके विधायकों की संख्या 25 से अधिक होती। यह स्थिति उस माय समीकरण पर फिर लौटने के लिए विवश कर रही है। पिछले कुछ दिनों के दौरान तेजस्वी की प्रतिक्रियाएं (जाति विशेष का एनकाउंटर आदि) इसकी पुष्टि कर रहीं।
अब एफआईआर के विरोध में सेव डेमोक्रेसी अभियान चलाया जाएगा। यह विमुख हो रहे मतदाताओं के मिजाज को आंकने का उपक्रम भी होगा। उल्लेखनीय है कि बिहार में कांग्रेस पहले से ही जनाधार विहीन है और वाम दल परंपरागत कैडरों तक सिमटे हुए। ऐसे में गंवाने और बचाने के द्वंद्व में सर्वाधिक बेचैन राजद ही है।
