पटना, राज्य ब्यूरो। बिहार में नौ जून को प्रस्तावित भाजपा की पहली चुनावी रैली की डेट बदल गई है। अब अमित शाह की वर्चुअल रैली 7 जून को होगी। इसके बाद राजद ने भी अपनी विरोध की डेट के साथ टाइम बदल दी है। मंगलवार की रात नेता प्रतिपक्ष ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। दरअसल, भाजपा की प्रस्‍तावित रैली का राजद अपने तरीके से विरोध करेगा। उस दिन को राजद गरीब अधिकार दिवस के रूप में मनाएगा। उसके नेता-कार्यकर्ता और समर्थक नई डेट के अनुसार 7 जून को अपने घर के दरवाजे पर खड़े होकर थाली, कटोरी या गिलास पीटकर सोई सरकार को जगाने की कोशिश करेंगे। जिनके पास बर्तन नहीं है, वे केले का पत्ता दिखाएंगे। अब कार्यक्रम 11 बजे दिन में होगा।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव ने मंगलवार की रात ट्वीट कर कहा कि 'राजद के दबाव में बीजेपी (BJP) ने प्रस्तावित 9 जून की वर्चुअल रैली को अब 7 जून को करने का निर्णय किया है। लोग कोरोना और भूख से मर रहे है, लेकिन बीजेपी रैली कर रही है। इनकी संवेदनहीनता के प्रतिकार में राजद भी अब 7 जून, रविवार को ही 'ग़रीब अधिकार दिवस' मनायेगा।' उन्‍होंने इसी ट्वीट में आगे लिखा है- 'हम गरीब, मजदूर, जनहित, जनसुरक्षा और जनअधिकार के लिए लड़ रहे हैं। हम गरीबों-मजदूरों के पेट की भूख मिटाना चाहते हैं। राजद के सभी कार्यकर्ता, समर्थक और बिहारवासी 7 जून को अपने-अपने घरों के बाहर सुबह 11 बजे थाली-कटोरा बजाएंगे।

उन्‍होंने इसके पहले सोमवार को कहा था कि आपदा की घड़ी में भी भाजपा को वोट और चुनाव की चिंता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा देश की पहली ऐसी बड़ी पार्टी है, जो कामगारों की मौत का जश्न मनाएगी। वोट के लिए उसने लोकलाज भी त्याग दी है। देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या दो लाख के पास पहुंच गई है। पीडि़तों की संख्या भी बढ़ रही है। किंतु भाजपा और जदयू को किसानों की चिंता नहीं है। सत्ता की भूख है। तेजस्वी ने पूछा कि क्या भाजपा वर्चुअल रैली को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सहमति मिल चुकी है। 

तेजस्वी ने कहा कि डिजिटल रैली करने वालों को आपदा में अगर जनता की चिंता होती तो वे डिजिटल जनसेवा करते, डिजिटल मदद करते। राजद प्रमुख ने एक बार कहा था कि गरीबों को डाटा से पहले आटा चाहिए। भाजपा को बताना चाहिए कि केंद्र के 20 लाख करोड़ के पैकेज में बिहार को क्या मिला? गरीबों को क्या मिला? नीतीश कुमार बताएं कि 15 सालों में पलायन रोकने के लिए क्या? रोजगार के लिए क्या किया? तेजस्वी ने मजदूरों को असहाय छोड़ देने का आरोप लगाते हुए कहा कि क्वारंटाइन केंद्रों के खाने में बिच्छू और कीड़े निकल रहे हैं। डिजिटाइजेशन का प्रयोग शासन, प्रशासन और सुशासन के लिए होना चाहिए न कि भाषण के लिए। 

Posted By: Rajesh Thakur

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