राज्य ब्यूरो, पटना: जातिगत जनगणना के मुद्दे पर केंद्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे के बाद बिहार में संयुक्त विपक्ष ने दबाव बढ़ा दिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन के घटक दलों ने शुक्रवार को बैठक करके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जातिगत जनगणना पर रुख स्पष्ट करने के लिए तीन दिनों की मोहलत दी है। तेजस्वी ने कहा कि एक बार मुख्यमंत्री का पक्ष आ जाए, उसके बाद हम लोग अपना एक्शन प्लान बनाएंगे। तेजस्वी ने 27 सितंबर को किसानों के भारत बंद का सक्रिय समर्थन देने की घोषणा की है। 

राबड़ी देवी के आवास में राजद, कांग्रेस एवं वामदलों के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक के बाद तेजस्वी ने मीडिया को बताया कि जातिगत जनगणना की लड़ाई जारी रहेगी। बिहार विधानसभा और विधान परिषद से दो-दो बार सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा गया था। यह बिहार की इच्छा है। राष्ट्रहित में है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार के सारे दल भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से 23 अगस्त को मिलने गए थे। हमने प्रस्ताव दिया था कि अगर केंद्र सरकार जातिगत जनगणना के लिए तैयार नहीं होती है तो राज्य सरकार को अपने खर्चे पर कराना चाहिए। केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के हलफनामे के बाद तय कर लिया है कि जातिगत जनगणना के पक्ष में नहीं है। तेजस्वी ने कहा कि ऐसे में अब मुख्यमंत्री को अपना स्टैंड साफ करना चाहिए। केंद्र में उनके गठबंधन की सरकार है। उनके पास तीन दिनों का समय है। उसके बाद संयुक्त विपक्ष अपना कार्यक्रम तय करेगा। विदित हो कि जाति जनगणना को लेकर केंद्र सरकार से उम्मीद लगाए नीतीश कुमार को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट में नरेंद्र मोदी सरकार ने कहा है कि वह जातिगत जनगणना कराने के पक्ष में नहीं है। मौके-मौके पर जदयू के नेता कहते रहे हैं कि केंद्र के मना करने पर वह खुद के खर्च से भी बिहार में जातिगत जनगणना करा सकते हैं।

Edited By: Akshay Pandey