पटना, जेएनएन। राबड़ी देवी के आवास पर शुक्रवार को राजद की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें तेजस्वी यादव के भी शामिल होने की बात की जा रही थी, लेकिन बैठक खत्‍म होने के बाद भी तेजस्वी पटना नहीं पहुंचे। बैठक की अध्यक्षता पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने की। उन्‍होंने कहा कि सभी विधायक, नेता व कार्यकर्ता एकजुट हैं।

तेजस्वी के बैठक में नहीं पहुंचने पर RJD_नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि तेजस्वी के मीटिंग में रहने, ना रहने से कोई भी फर्क  नहीं  पड़ता है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी हमारे नेता हैं, वो नेता प्रतिपक्ष हैं। हम उम्मीद करते हैं कि तेजस्वी आगे की मीटिंग में रहेंगे। इसके साथ ही तेजस्वी को दी गयी खुद की नसीहत पर बोले शिवानंद, 'मेरी बात कौन मानता है।'

तेजस्वी के बैठक में नहीं आने पर राहुल तिवारी ने कहा कि 'हमलोगों ने RJD, लालटेन का झंडा थामा है। तेजस्वी यादव भी उसी झंडे को थाम कर खड़े हैं। लालू प्रसाद-राबड़ी देवी हमारी नेता हैं। राबड़ी देवी के नेतृत्व में हम आगे बढ़ रहे हैं।

तेजस्वी के बैठक में नहीं आने पर राजद नेता अब्दुल गफूर ने खुद को किनारा करते हुए कहा कि तेजस्वी किसी जरूरी काम से दिल्ली में हैं। उन्हें आज पटना आना था। हालांकि वे नहीं आ सके हैं। वहीं RJD विधायक  आलोक मेहता ने कहा कि तेजस्वी यादव आएंगे या नहीं, ये सवाल मुझसे नहीं पूछिए, हमारी सदस्यता अभियान की इंटरनल मीटिंग चल रही है।   

बता दें कि  राजद सदस्यता अभियान को लेकर पार्टी के वर्तमान एवं पूर्व विधायकों, सांसदों, पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई, लेकिन इसमें तेजस्वी अभी तक नहीं आए हैं। हालांकि राजद नेताओं ने यह भी कहा कि उनसे सहमति लेने के बाद ही बैठक की तारीख और जगह तय की थी। 

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद लगातार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बिहार से बाहर हैं। वह सोशल मीडिया से भी गायब हैं, लेकिन कुछ दिनों पहले उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों को लेकर एक ट्वीट किया था। उन्होंने कहा कि जनता को जानने का हक है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री कहां हैं? इस पर बीजेपी नेता नवल किशोर यादव ने पलटवार किया है। कहा है कि किस बिल में छिपे हैं तेजस्वी।

दरअसल लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद से ही तेजस्वी यादव गायब हैं। वह पार्टी के कार्यक्रम में भी भाग नहीं लेते हैं। तेजस्वी यादव आरजेडी के सदस्यता अभियान के कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुए थे और उसे पहले लगभग एक महीने तक चले बिहार विधानसभा के मानसून सत्र से भी गायब रहे। उनके गायब रहने के कारण ही विपक्षी पार्टियां  लगातार उनपर निशाना साध रही हैं।  

Posted By: Kajal Kumari