मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

पटना [जागरण टीम]। बिहार में बाढ़ (Bihar Flood) के कहर का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भी संज्ञान लिया है। उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) व उपमुख्‍यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) से हालात की जानकारी ली है। इस बीच उत्‍तर बिहार में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं हैं। दरभंगा-समस्तीपुर रेलखंड पर मंगलवार को लगातार तीसरे दिन भी ट्रेनों का परिचालन ठप है। राहत की बात यह है कि कोसी व सीमांचल में नदियां स्थिर हुईं हैं। लेकिन अब कटाव का खतरा सामने दिख रहा है।
प्रधानमंत्री ने नीतीश-सुशील मोदी से ली बाढ़ की जानकारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी से बिहार में आई भीषण बाढ़ के बारे में बातचीत की। मोदी ने खुद फोन कर बिहार में बाढ़ की ताजा स्थिति के बारे में जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार बाढ़ पीडि़तों को राहत देने के हर संभव उपाय करेगी।
प्रधानमंत्री ने बाद में टवीट कर इस बातचीत का ब्योरा साझा किया। उन्होंने कहा कि बाढ़ राहत में केंद्र सरकार राज्य के साथ सहयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हर तरह की सहायता के लिए तैयार है।

समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड पर तीसरे दिन भी परिचालन बाधित
उत्‍तर बिहार के दरभंगा व समस्‍तीपुर की बात करें तो समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड पर तीसरे दिन भी ट्रेनों का परिचालन बाधित है। हायाघाट-थलवारा स्टेशन के मध्य बाढ़ का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। कुछ ट्रेनों को रद कर दिया गया है। प्रमुख ट्रेनें मार्ग परिवर्तित कर चलाई जा रही हैं। मधुबनी के बेनीपट्टी प्रखंड के आधा दर्जन गांव भी बाढ़ के पानी से घिरे हैं।

शिवहर- मोतिहारी पथ पर आवागमन बंद
सीतामढ़ी में बागमती और अधवारा समूह की नदियों के तेवर में नरमी है, मगर सोनबरसा, सुप्पी, बोखड़ा और रुन्नीसैदपुर के दर्जनों गांव, सीतामढ़ी शहर के कई मोहल्ले अब भी बाढ़ की गिरफ्त में हैं। सुप्पी और रुन्नीसैदपुर प्रखंड क्षेत्र में डूबने से दो युवकों की मौत हो गई। शिवहर में 20 दिन बाद एनएच 104 पर छोटे वाहनों का परिचालन शुरू हो गया है। लेकिन, एसएच 54 शिवहर- मोतिहारी पथ पर आवागमन बंद है। दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी में कोसी व कमला-बलान के जलस्तर में वृद्धि हो रही है।

चंपारण में ऊफान मार रहीं गंडक समेत अन्य पहाड़ी नदियां
पश्चिम चंपारण में गंडक समेत अन्य पहाड़ी नदियां पहले से शांत हैं, लेकिन अभी भी ऊफान मार रहीं हैं। कई स्थानों पर आवागमन बाधित है। हालांकि, पूर्वी चंपारण में नदियों के जलस्तर में गिरावट के साथ जीवन पटरी पर लौटने लगा है।

कोसी व बागमती अभी भी खतरे के निशान से ऊपर
नेपाल स्थित कोसी, बागमती और बूढ़ी गंडक नदी के जल अधिग्रहण क्षेत्र में बारिश में कमी से खगडिय़ा के बलतारा में कोसी और संतोष स्लूईस के पास बागमती स्थिर हो गई है, लेकिन दोनों नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर हीं हैं। बूढ़ी गंडक खतरे के निशान से नीचे आ गई है।

महानंदा खतरे के निशान से ऊपर, गंगा भी करीब
सुपौल में कोसी में उतार-चढ़ाव जारी है। सहरसा में कोसी नदी का जलस्तर सामान्य है। मधेपुरा में कोसी व सुरसर नदियों का जलस्तर लगातार घट रहा है। अररिया में भी बकरा, नूना, परमान आदि नदियों के जलस्तर में काफी कमी हुई है।  कटिहार में महानंदा अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गंगा भी चेतावनी स्तर के करीब आ चुकी है ।

पानी घटने के साथ अब कटाव का खतरा
कोसी-सीमांचल के बाढ़ प्रभावित इलाकों की नदियों में धीरे-धीरे पानी कम हो रहा है। प्रभावित लोग अब गांव लौटने की तैयारी में हैं। लेकिन पानी घटने के साथ कटाव का खतरा भी गहराता दिख रहा है। किशनगंज में जलस्तर घटने से महानंदा, मेंची, कनकई व अन्य नदियों किनारे कटाव तेज हो भी गया है।

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Posted By: Amit Alok

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