पटना,[चंद्रशेखर]। रेलवे में ठेकेदार और अभियंताओं के गठजोड़ को समाप्त करने के लिए महकमे ने ठोस पहल शुरू कर दी है। इसके लिए रेलवे ने विकास कार्यो के टेंडर की प्रक्रिया में कई तरह के बदलाव किए हैं। रेलवे बोर्ड की ओर से दानापुर समेत तमाम रेल मंडलों को टेंडर प्रक्रिया में व्यापक सुधार के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संशोधन करने का निर्देश दिया गया है। दानापुर मंडल रेल प्रबंधक ने टेंडर की पुरानी प्रक्रिया को बदल दिया है। योजनाओं पर निगरानी को प्रत्येक मंडल में एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट की बहाली करने का निर्देश दिया है।

प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट ठेकेदारों व इंजीनियरों की रिपोर्ट के साथ ही कराए गए कार्य की मॉनीट¨रग करेंगे। इसकी रिपोर्ट मंडल रेल प्रबंधक को देनी होगी। मंडल रेल प्रबंधक रंजन प्रकाश ठाकुर ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया में व्यापक सुधार किए गए हैं। पहले ठेकेदार को कई तरह के कागजात जमा करने पड़ते थे, जिसमें फर्जीवाड़ा किया जाता था। रेलवे की ओर से जांच रिपोर्ट मांगने पर संबंधित विभागों से कोई जवाब नहीं मिलता था। अब ठेकेदार से शपथ पत्र देने को कहा जाएगा। उनसे तीन वित्तीय वर्षो का आयकर रिटर्न मांगा जाएगा।

टेंडर होने के बाद कंपरेटिव चार्ट के लिए सीधे कंप्यूटर से रिपोर्ट ले ली जाएगी। बाबुओं का चक्कर समाप्त करने की कोशिश भी हो रही है। टेंडर डालने से काम शुरू होने तक कई चरणों को कम कर दिया गया है। पहले आइओडब्ल्यू अथवा पीडब्लूआइ किए गए कार्य का आकलन करते थे। अब ठेकेदार स्वयं अपने काम का आकलन कर फाइनल रिपोर्ट सौंपेंगे। पहले नापी रिपोर्ट इंजीनियर को देनी होती थी, अब यह ठेकेदार को देनी होगी। प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट की बहाली जल्द होगी और इसके बाद कार्य में तेजी आएगी। टेंडर डिस्चार्ज करने के पहले अब रेल अधिकारियों को सभी तर्क रखने होंगे।

Posted By: Jagran