पटना, प्रभात रंजन। Dussehra 2022: दशहरा में आज शाम पटना के गांधी मैदान में रावण दहन होगा। इसमें मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार भी शिरकत करेंगे। बिहार की राजधानी पटना में दुर्गा पूजा के मौके पर रावण दहन कार्यक्रम का इतिहास काफी पुराना है। गांधी मैदान में पहली बार रावण दहन कार्यक्रम की शुरुआत आजादी के बाद पाकिस्तान से पलायन कर पटना आए पंजाबी समुदाय के लोगों ने ने आरंभ की थी। देश के बंटवारे के बाद पंजाब से 350 परिवार बिहार आया था।

1955 से हुई रावण दहन की शुरुआत 

बक्शी राम गांधी का परिवार लाहौर के पास सटे गांव से पटना आकर लोगों के साथ मिलकर रावण दहन की नींव रखी थी। 1954 में दशहरा कमेटी का गठन किया गया था। वहीं इसके बाद 1955 से रावण दहन कार्यक्रम की शुरूआत हो गई।

वैद्यनाथ आयुर्वेद के मालिक बने अध्‍यक्ष 

वैद्यनाथ आयुर्वेद के तत्कालिक मालिक दुर्गा प्रसाद शर्मा को कमेटी का प्रथम अध्यक्ष चुना गया था। उनके नेतृत्व में गांधी मैदान में दशहरा कमेटी ने रावण दहन समारोह का आयोजन किया गया था। कमेटी में पीके कोचर, ओपी कोचर, विशन दास, टीआर मेहता, प्रेमनाथ अरोड़ा, ओपी बिहारी, संतोष चंद्रा समेत अन्य लोगों शामिल थे।

किसानों के चंदे से होता था आयोजन 

दशहरा कमेटी के ट्रस्टी की मानें तो कमेटी के गठन होने के बाद राजधानी में आइस फैक्ट्री  नाम से एक कोल्ड स्टोरेज खोला गया था। कोल्ड स्टोरेज चाणक्या होटल के परिवार वालों की ओर से खोला गया था। कोल्ड स्टोरेज में किसानों से आलू रखने के लिए एक रुपये चंदे के रूप में लिया जाता था। किसानों व अन्य लोगों के चंदे से रावण दहन का आयोजन हुआ था।

1990 में लालू यादव भी हुए थे शामिल 

1990 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव समारोह में पहली बार भाग लेने आए थे। दशहरा कमेटी के अध्यक्ष कमल नोपानी की मानें तो रावण दहन देखने को पटना व इसके आसपास इलाकों से काफी संख्या में आते रहे हैं।

पहली बार बना था 50 फीट का रावण  

शहर में पहली बार रावण दहन के लिए 50 फीट का रावण, 40 फीट का कुंभकर्ण और 30 फीट का मेघनाथ का पुतला बनाया गया था। वहीं इसके बाद से शहर में प्रतिवर्ष रावण दहन कार्यक्रम निरंतर आयोजित होता रहा है। 

Edited By: Shubh Narayan Pathak

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