राज्य ब्यूरो। Ram Vilas Paswan Death News:  पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के संस्थापक व पिता रामविलास पासवान  (Ram Vilas Paswan) के निधन के बाद चिराग पासवान कई बार भावुक हुए। कई बार फूट-फूटकर बच्‍चों की तरह रो पड़े। कभी वे खुद काे संभालते तो कभी मां को ढाढस बंधाते रहे। अंतिम यात्रा के दौरान भी वे गुमसुम दिखे। सांसद राम कृपाल यादव शनिवार, 10 अक्‍टूबर की सुबह जब रामविलास पासवान के पटना स्थित आवास पर उनके अंतिम दर्शन को पहुंचे तब भी उनसे बात करते वक्‍त चिराग खुद की भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए। वे राम कृपाल यादव के कंघों पर सिर रखकर उन्‍हें पकड़कर फूट-फूटकर रोने लगे। ढाढस बंधाते-बंधाते खुद सांसद भी बिलखने लगे। माहौल बेहद गमगीन हो गया। सांसद खुद को संभाल कर काफी देर तक वे चिराग को शांत कराने की कोशिश करते रहे।

शुक्रवार को भी जब राम विलास पासवान का पार्थिव शरीर वायुसेना के विशेष विमान से दिल्ली से पटना लाया गया तब एयरपोर्ट पर श्रद्धांजलि देते वक्‍त पुत्र चिराग पासवान फूट-फूटकर रोए। चिराग के दुख पर मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गई। सीएम नीतीश कुमार भी पुष्‍पांजलि अपर्ति करते वक्‍त खुद की भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए और आंसू छलक गए। हालांकि ऐस वक्‍त में भी चिराग स्‍वजनों को ढाढस बंधाते दिखे। पटना एयरपोर्ट पर वे पूरे वक्‍त मां का हाथ थामे रहे।

इससे पहले भी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्‍ली स्थित आवास पर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित कर स्‍वजनों की तरफ बढ़े तब भी चिराग फूट-फूटकर रोते रहे। प्रधानमंत्री उनके कंधे पर हाथ रखकर ढाढस बंधाते रहे। वे चिराग की तब तक पीठ सहलाते रहे जब तक उन्‍होंने अपनी भावनाओं पर काबू न पा लिया।

अब चिराग पर पार्टी और परिवार की जिम्‍मेदारी

वर्तमान भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर रहे रामविलास पासवान असमय चले गए... बिहार की राजनीति में एक कोना शून्य हो गया...न जाने कितनी बातें लोजपा दफ्तर में आने वाले लोगों की जुबान से निकल रही थीं। वाकई, रामविलास पासवान चले गए और परिवार से लेकर लोक जनशक्ति पार्टी की पूरी जिम्मेवारी अब चिराग पासवान के कंधे पर आ गई है। उनके समर्थक यह भी जता रहे हैं कि चिराग के लिए यह कठिन दौर है। लेकिन, वे पिता से सीखे गुणों के बूते हर चुनौती को पार कर जाएंगे। चिराग भी अपने पिता से करीबी से जुड़े रहे हैं। पिता का साया भले न साथ हो पर उनसे ग्रहण किए गए हर गुण चिराग के काम आएंगे और उसी के बल पर परिवार और पार्टी को आगे ले जाने में कामयाब होंगे। आज लोजपा कार्यालय में कई समर्थकों के मुंह से यह भी सुनने को मिला कि अब बड़ा सवाल है बिहार चुनाव के नतीजों पर दिवंगत वरिष्ठ दलित नेता के निधन का कितना प्रभाव होगा?

 कोने-कोने से अपने नेता के  दर्शन  को उमड़ी  भीड़

केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान के अंतिम दर्शन के लिए शुक्रवार को प्रदेश के कोने-कोने से प्रशंसकों और समर्थकों की भीड़ लोजपा कार्यालय में लगी रही। समर्थकों के बीच रह-रहकर 'रामविलास अमर रहें' के नारे भी लगते रहे। इस दौरान कार्यालय परिसर में बनाए गए पंडाल और उसके बीच निर्मित अस्थायी मंच पर अपने दिवंगत नेता के पार्थिव शरीर को पुष्पांजलि अर्पित करने वालों का तांता देर रात तक लगा रहा। श्रद्धांजलि देने वाले में हर दल के छोटे-बड़े नेता दिखे। वहीं प्रशासन ने वीआइपी मूवंमेंट को देखते हुए लोजपा कार्यालय से लेकर एयरपोर्ट तक सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम किया था।

भावुक होकर निहार रहे थे लोग

लोजपा कार्यालय के प्रवेश द्वार से लेकर परिसर तक को फूलों से सजाया गया था और जगह-जगह पर रामविलास पासवान की तस्वीर लगाई गई थी। दोपहर से ही परिसर में भजन और निर्गुण के अलावा सर्व धर्म वाणी भी गुंजती रही। अपने दिवंगत नेता का अंतिम दर्शन के लिए जो भी लोग आ रहे थे, परिसर में लगी तस्वीरों को भी भावुक होकर निहार रहे थे। ऐसे लोग भी दिखे जो रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान और उनके परिजनों को सांत्वना देते हुए ढांढ़स बंधाते खुद ही रो पड़े। जन अधिकार पार्टी के प्रमुख पप्पु यादव, भाकपा माले के दीपंकर भट्टाचार्य और राज्य सचिव कुणाल, माकपा के अवधेश कुमार, वीआइपी के प्रवक्ता आनंद मधुकर समेत कई अन्य नेताओं ने लोजपा कार्यालय में दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी।

 रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी की आंखों से थम नहीं रहे थे आंसू

 केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन की खबर पहुंचते ही बिहार के खगडि़या जिले के शहरबन्‍नी स्थित उनके पैतृक गांव में मातम पसर गया।  पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी की आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे। संपूर्ण फरकिया में गम की चादर पसर गई है। प्रतीत होता था कि खगडिय़ा जिलान्तर्गत शहरबन्नी के बगल में बह रही करेह नदी में 'तकलीफ का समंदर' बह रहा है। सभी कह रहे हैं कि फरकिया ने अपने लाल को खो दिया है। इसलिए दिल में कचोट है। गुरुवार की रात से  शुक्रवार देर शाम तक रामविलास पासवान के पैतृक आवास पर लोग जुटे रहे।

 

 

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