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ओडिशा माॅडल पर विकसित होगा राजगीर का स्पोर्ट्स साइंस सेंटर,खेल विभाग की टीम अध्ययन के लिए रवाना

Published: Tue, 18 Aug 2026 02:13 PM (IST)

राजगीर में बनने वाले स्पोर्ट्स साइंस सेंटर को ओडिशा मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिसके लिए बिहार से विशेषज्ञों की एक टीम ओडिशा रवाना हुई है।

बिहार राज्‍य खेल अकादमी पर‍िसर में बनेगा स्‍पोर्ट्स साइंस सेंटर। फाइल

बिहार राज्‍य खेल अकादमी पर‍िसर में बनेगा स्‍पोर्ट्स साइंस सेंटर। फाइल

HighLights

  1. राजगीर स्पोर्ट्स साइंस सेंटर ओडिशा मॉडल पर विकसित किया जाएगा।

  2. बिहार की टीम ओडिशा के उच्च प्रदर्शन खेल सुविधाओं का अध्ययन करेगी।

  3. यह सेंटर खिलाड़ियों के वैज्ञानिक विश्लेषण और चोट रोकथाम पर केंद्रित होगा।

जागरण संवाददाता, पटना। राजगीर स्थित राज्य खेल अकादमी में स्पोर्ट्स साइंस सेंटर (उच्च प्रदर्शन खेल प्रशिक्षण एवं इंज्युरी सेंटर) की स्थापना को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है।

इसके लिए अगले सप्ताह टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। खेल विभाग इस सेंटर को ओडिशा माडल पर विकसित करेगा।

वहां संचालित उच्च प्रदर्शन खेल सुविधाओं और खेल विज्ञान की बारीकियों को समझने के लिए विभाग की टीम को रवाना किया गया है।

सेंटर की बारीकियों को समझेगी बिहार के विशेषज्ञों की टीम 

टीम वहां की व्यवस्थाओं, तकनीक, प्रशिक्षण प्रणाली और खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जा रही वैज्ञानिक सुविधाओं का अध्ययन करेगी, ताकि बिहार में विकसित होने वाला सेंटर आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सके।

खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि आज के दौर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के लिए केवल पारंपरिक प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है।

खिलाड़ियों के प्रदर्शन का वैज्ञानिक विश्लेषण, शरीर की क्षमता के अनुरूप प्रशिक्षण, चोट की रोकथाम और मानसिक मजबूती खेल की तैयारी का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

इसी जरूरत को देखते हुए बिहार में पहली बार समर्पित स्पोर्ट्स साइंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है।

स्पोर्ट्स मेडिसिन, परफार्मेंस एनालिसिस और रीहैबिलिटेशन की सुविधाएं एक ही परिसर में होंगी उपलब्ध

सेंटर में बायोमैकेनिक्स एवं परफार्मेंस एनालिसिस लैब, मोशन कैप्चर और 3डी कैमरा सिस्टम की मदद से खिलाड़ियों की रनिंग तकनीक, थ्रोइंग एक्शन और जंपिंग पाश्चर का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाएगा।

फोर्स प्लेट्स के माध्यम से दौड़ने और कूदने के दौरान पैरों पर पड़ने वाले दबाव तथा ग्राउंड रिएक्शन फोर्स का आकलन होगा।

स्पोर्ट्स फिजियोलाजी एवं टेस्टिंग के तहत एडवांस ट्रेडमिल और मास्क एनालिसिस से फेफड़ों एवं हृदय की ऑक्सीजन क्षमता की जांच की जाएगी।

लैक्टेट थ्रेशोल्ड टेस्टिंग से थकान और शरीर में लैक्टिक एसिड बनने की सीमा का पता लगाया जाएगा। इन रिपोर्टों के आधार पर खिलाड़ियों के लिए उनकी क्षमता और खेल की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण योजना तैयार की जा सकेगी।

स्पोर्ट्स न्यूट्रिशनिस्ट खिलाड़ियों की खेल और शारीरिक जरूरत के अनुसार डाइट (खुराक) प्लान तैयार करेंगे। वहीं, स्पोर्ट्स साइकोलाजिस्ट प्रतियोगिताओं के दबाव से निपटने, आत्मविश्वास बढ़ाने और मानसिक मजबूती विकसित करने में खिलाड़ियों की मदद करेंगे।