पटना। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का समाधि स्थल अबतक पर्यटन के रूप में विकसित नहीं हो सका। हालांकि एक बार योजना बनी थी। तीन करोड़ रुपये स्वीकृत भी हुए। बाद में भूमि विवाद होने पर 10 वर्ष पहले राशि लौटा दी गई। इससे समाधि स्थल पर्यटन के मानचित्र पर नहीं आ सका।

पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव रश्मि वर्मा के कार्यकाल में राशि स्वीकृत हुई थी। इसके बाद योजना ही नहीं बनी। राजेंद्र प्रसाद का समाधि स्थल बांसघाट के पास स्थित है। जन्मतिथि और पुण्यतिथि के अवसर पर महज इसे फूलों के गमले से सजा दिया जाता है। 28 फरवरी को पुण्यतिथि मनाई जाएगी। इसके लिए टेंट लगाए जा रहे हैं।

बता दें कि समाधि स्थल कैम्पस काफी बड़ा है। यहां लंबा मैदान भी है। इसे पार्क के रूप में विकसित किया जा सकता है। फिलहाल यह उपेक्षित पड़ा है। यहां बैठने की भी व्यवस्था नहीं है। तीन करोड़ की लागत से समाधि स्थल के अगले हिस्से में तालाब का निर्माण एवं पर्यटकों के लिए एक बेहतर जगह बनाने की योजना थी, तभी गंगा तरफ की जमीन पर विवाद कायम हो गया।

जीवन का अंतिम दिन पटना में ही बिताए थे: राजेंद्र प्रसाद दो बार राष्ट्रपति रहने के बाद जीवन का अंतिम दिन पटना में बिताए। मृत्यु होने के बाद बांसघाट स्थित गंगा तट पर अंतिम संस्कार किया गया था। दिल्ली में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अंतिम संस्कार के बाद बना राजघाट पर्यटन के मानचित्र पर है। पर्यटक यहां हमेशा जाते हैं। जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, चौधरी चरण सिंह, राजीवगांधी आदि का समाधि स्थल बेहतर स्थिति में है।

Posted By: Jagran

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