पटना [अरविंद शर्मा]। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का पटना में अपने दल के प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा (शॉटगन) के समर्थन में रोड शो गुरुवार को होने जा रहा है। कांग्रेस के लिए यह किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि पांच दिन पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी पटना में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद एवं रामकृपाल यादव के समर्थन में रोड शो कर चुके हैं। आखिरी दौर के चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले होने जा रहे कांग्रेस के उक्त कार्यक्रम की तुलना भाजपा अध्यक्ष के रोड शो से होना स्वाभाविक है। इसलिए तैयारियां जोरों पर हैं। रूट तय है। अब इसमें भीड़ का जुगाड़ करना है।
बिहार में चुनाव का अंतिम बड़ा कार्यक्रम
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज शाम में रोड शो करेंगे। राहुल के रोड शो के बाद दोनों राष्ट्रीय दलों का इस संसदीय चुनाव में बिहार में कोई और बड़ा कार्यक्रम नहीं होना है। इसलिए गठबंधन की पूरी कोशिश भाजपा छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामने वाले फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा के पक्ष में माहौल बनाने की है। इसमें राजद का भी सहयोग है। पटना में रोड शो से पहले वे राजद प्रत्याशी डॉ. मीसा भारती के पक्ष में राजधानी के ग्रामीण क्षेत्र (बिक्रम) में एक चुनावी रैली को भी संबोधित कर रहे हैं।
आंतरिक मोर्चे पर आ रही दिक्‍कत
महागठबंधन के दूसरे घटक दल भी कांग्रेस के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, किंतु रणनीतिकारों को सबसे बड़ी दिक्कत आंतरिक मोर्चे पर आ रही है। पिछले दो संसदीय चुनावों में शत्रुघ्न सिन्हा जिन समर्थकों के बूते जीत का प्रबंध करते आ रहे हैं, इस बार उसका अभाव साफ-साफ दिख रहा है। यही कारण है कि उन्‍हें इस बार अपने ही गृह क्षेत्र में पसीना आ रहा है। शत्रुघ्न के समर्थक और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का स्वाभाविक मिलन नहीं हो पा रहा है। दल बदलने का सीधा असर दमदारी पर पड़ता दिख रहा है। ऐसे में भाजपा के बराबर भी शत्रुघ्न अगर भीड़ जुटा लें तो कांग्रेस के नजरिए से यह कार्यक्रम सफल माना जाएगा।
रोड शो में भीड़ दिखाना बड़ी चुनौती
कांग्रेस के लिए दूसरी मुसीबत यह है कि राहुल के रोड शो का रास्ता पटना में मोइनुल हक स्टेडियम से नाला रोड होते हुए बुद्धमूर्ति तक है। यह अमित शाह के रोड शो के रास्ते की तुलना में अधिक चौड़ा है। भाजपा की तुलना में महानगर में कांग्रेस के पास कुशल प्रबंधकों की कमी है। वक्त भी ज्यादा नहीं है। ऐसे में भीड़ दिखाना भी अपने आप में बड़ी चुनौती होगी।

कांग्रेस से ज्यादा राजद पर भरोसा
तकरीबन तीन दशक तक भाजपा की राजनीति करने के बाद अचानक कांग्रेस से टिकट लेकर पटना साहिब में टपके शत्रुघ्न सिन्हा के सामने आंतरिक मोर्चे को दुरुस्त करना बड़ी चुनौती है। कांग्रेस के पास कार्यकर्ता नहीं हैं। जो थोड़े-बहुत हैं भी, उन्हें ऐसे कार्यक्रमों के प्रबंधन का अनुभव नहीं है। साथ ही उनपर शत्रुघ्न को भरोसा करना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में राजद कार्यकर्ताओं का बड़ा सहारा है।
पटना महानगर राजद अध्यक्ष महताब आलम, पूर्व डिप्टी मेयर संतोष कुशवाहा और आशीष रंजन जैसे राजद नेता-कार्यकर्ता शत्रुघ्न के लिए अथक मेहनत कर रहे हैं। लालू परिवार से शत्रुघ्न के करीबी रिश्ते के कारण राजद तन-मन से साथ दे रहा है। धन शत्रुघ्न के पास है ही।

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Posted By: Amit Alok

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