पटना [राज्य ब्यूरो]। राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) ने अपने बयान से शनिवार को बिहार के सियासी पारे को उछाल दिया था। दिनभर बयानबाजी और इकरार-इनकार का दौर चलता रहा, लेकिन शीर्ष नेतृत्व की नाराजगी के बाद उन्‍होंने देर शाम यू-टर्न ले लिया। इसके बाद रविवार को उन्‍होंने अपनी बातों को विस्‍तार से रखा। विदित हो कि रघुवंश प्रसाद सिंह ने पहले यह कहा था कि अंदरखाने में जनता दल यूनाइटेड (JDU) को महागठबंधन (Grand Alliance) में साथ लाने की कोशिश शुरू हो चुकी है और बहुत जल्द नतीजा आ जाएगा। 

जनतंत्र में बोलने की सबको आजादी
राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने रविवार को अपनी सफाई के साथ ही राज्य और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला किया और राज्यपाल फागू चौहान को संवैधानिक मर्यादा की नसीहत दी। जदयू के बयान से पीछे हटते हुए उन्होंने कहा कि जनतंत्र में बोलने की आजादी है। मैं जो महसूस करता हूं, उसे बोलता हूं। निर्णय लेना पार्टी का काम है। पार्टी जो फैसला करेगी, उसे मानूंगा। 

राज्‍यपाल पद की मर्यादा हाेती है 
राजद कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके रघुवंश सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी में बोलने पर रोक नहीं है, किंतु फैसला सबकी सहमति से होता है। एक कार्यक्रम में राज्यपाल के शिरकत करने के मसले पर सिंह ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को जातीय सम्मेलनों में जाने से बचना चाहिए। फागू चौहान ने राज्यपाल के पद का जातीय नजरिए से इस्तेमाल किया। राज्यपाल पद की मर्यादा होती है। वह सबके होते हैं। किसी एक के नहीं। राजद इसके विरोध में अगले महीने आंदोलन करेगा। 

मंदी पर केंद्र सरकार को घेरा
रघुवंश सिंह ने मंदी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा और कहा कि देश में गंभीर आर्थिक संकट है। जीडीपी की वृद्धि दर सात से घटकर पांच पर आ गई है। उत्पादन, निवेश और निर्यात घट गया है। बेरोजगारी बढ़ गई है। नौकरी छूट रही है। बदले की भावना से चिदंबरम और डीके शिवकुमार पर कार्रवाई हुई है। रघुवंश ने जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया और कहा कि अपराध में वृद्धि हुई है। एनआरसी में लाखों नाम छोड़ देने से लोग आतंकित हैं। सरकार खजाना भरने के लिए जुर्माना वसूल रही है। 

बिहार में 12 लाख वृद्धा पेंशन से वंचित
वृद्धा पेंशन से राज्य में 12 लाख लोग वंचित हैं। 24 हजार टोले में अप्रोच रोड नहीं है। दाखिल-खारिज नहीं हो रहा। घूसखोरी चरम पर है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीके चौधरी, नंदू यादव एवं निर्भय अंबेडकर भी मौजूद थे। 

शनिवार को बयान से मचा था बवाल 
जेडीयू को महागठबंधन में शामिल करने को लेकर रघुवंश के शनिवार को दिए बयान ने बवाल मचा दिया। आंच जेडीयू और बीजेपी (भारतीय जनता पर्टी) तक भी पहुंची। दोनों गठबंधनों की तरफ से बयान आने लगे। जेडीयू ने रघुवंश के बयान को खारिज किया, तो कांग्रेस (Congress) ने समर्थन। जेडीयू ने कहा कि अारजेडी भ्रम फैलाकर हित साधना चाह रहा है।
तेजस्‍वी ने किया था तलब
तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को जानकारी मिली तो उन्होंने पहले महागठबंधन में जेडीयू की वापसी की संभावनाओं को खारिज किया और उसके बाद रघुवंश सिंह के बयान को निजी विचार करार देकर हवा निकाल दी। देर शाम रघुवंश सिंह को तेजस्वी ने तलब भी कर लिया और उनके बयान से आरजेडी के संभावित नुकसान का समीकरण समझाया। राबड़ी देवी (Rabri Devi) के आवास से निकलते ही रघुवंश ने अपने बयान का भावार्थ समझाया कि उनके कहने का मतलब ऐसा नहीं था। इसी के बाद रविवार को उन्‍होंने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में अपनी बात रखी। 
क्‍या है मामला, जानिए
इसके पहले रघुवंश सिंह ने बीजेपी (BJP) नेता संजय पासवान (Sanjay Paswan) और सीपी ठाकुर (CP Thakur) के बयानों का हवाला देते हुए कहा था कि बीजेपी में हर बयान का मतलब होता है। बकौल रघुवंश, संजय ने नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को बिहार खाली करने की सलाह दी और बाद में सीपी ठाकुर ने इसकी पुष्टि की। रघुवंश के मुताबिक नीतीश कुमार के लिए ऐसे बयान बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर दिलाए गए। रघुवंश ने दावा किया कि नीतीश को दिल्ली जाने का इशारा किया जा रहा है। किंतु आरजेडी ऐसा आंदोलन खड़ा करेगा कि हम सब साथ आ जाएंगे। रघुवंश ने दावा किया कि अंदरखाने बात और कोशिश शुरू भी हो चुकी है और बहुत जल्द नतीजा भी आ जाएगा। दूसरी ओर रघुवंश के दावे की हवा निकालते हुए तेजस्वी ने कहा कि नीतीश कुमार के साथ गठबंधन का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता।

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