पटना, राज्य ब्यूरो। Raghuvansh Prasad Singh Death  News : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को बिहार से जुड़ी पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय की 901 करोड़ रुपये की तीन योजनाओं का वर्चुअल समारोह में शुभारंभ कर रहे थे। इसी बीच उन्‍हें महान समाजवादी नेता रधुवंश प्रसाद सिंह के निधन की सूचना मिली। उन्‍होंने रधुवंश बाबू के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्‍यक्‍त की। कहा , उनके जाने से बिहार और देश की राजनीति में शून्‍य पैदा हो गया है। उन्‍होंने जमीन से जुड़ी राजनीति की।  वे गरीबी को करीब से जाननेवाले नेता थे। पीएम मोदी ने कहा, पिछले 3-4 दिनों से रघुवंश बाबू चर्चा में थे। इस बीच मैं भी लगातार उनके स्‍वास्‍थ्‍य की जानकारी ले रहा था। लगा कि जल्‍द स्‍वस्‍थ होकर वे फिर सेवा कार्य में जुट जाएंगे। मगर यह बेहद दुखद खबर आई।

उनके आखिरी पत्र में जताई इच्‍छा पूरा करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा मैं बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से अाग्रह करता हूं कि पिछले तीन-चार दिनों में अपने पत्र में रघुवंश बाबू ने वैशाली के बारे में जो भी चिंता व्‍यक्‍त की उसे सबलोग मिलकर पूरा करने का हरसंभव प्रयास करें। उन्‍होंने कहा कि  इन दिनों रघुवंश बाबू के भीतर कुछ बातों को लेकर मंथन चल रहा था।   रघुवंशजी ने जिन आदर्शो को लेकर राजनीति की और जिसके साथ चले थे, उनके साथ रहना संभव नहीं हो पा रहा था। अस्‍वस्‍थ होते हुए भ्‍ाी उन्‍हें अपने क्षेत्र वैशाली की भी उतनी ही चिंता थी। उन्‍होंने अपनी चिंता बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार जी को पत्र लिखकर व्‍यक्‍त की । उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार का ध्‍यान वैशाली के विकास की ओर भी आकृष्‍ट कराया है। मेरा बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह है कि उन्‍होंने पत्र में जो भी इच्‍छा जताई है उसे मैं और आप मिलकर पूरा करें। उनके सपनों और विकास कार्यो को हमलोग पूरा करेंगे।

पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि भाजपा संगठन में रहते हुए भी उनसे लगातार परिचय रहा। मैं और रघुवंश बाबू कई बार टीवी पर कार्यक्रम में डिबेट करते थे।

तीन दिन पहले ही आइसीयू से ही राजद से इस्‍तीफा दिया था

बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री रधुवंश सिंह ( Raghuvansh Singh) का आज रविवार को नई दिल्ली के आॅल इंडिया इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS)  में निधन हो गया। वे 74 वर्ष के थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री डाॅ. रघुवंश सिंह ने राजद से राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष पद से हाल ही में एम्‍स से ही राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) को पत्र लिखकर इस्‍तीफा दे दिया था। इस्‍तीफा देने के बाद वे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) तथा राजद प्रमुख लालू प्रसाद को पत्र लिखने को लेकर चर्चा में थे। उन्‍होंने नीतीश कुमार को लिखे पत्र में दुनिया के सबसे पहले गणतंत्र (First Republic of the world) वैशाली का सम्‍मान का मुद्दा उठाया । जिसके बाद गणतंत्र की जननी वैशाली की चर्चा पूरे देश में होने लगी। उनकी समाजवादी छवि के कारण सभी दलों के नेता उनका सम्‍मान करते थे।

कल भी नीतीश के नाम लिखा था पत्र

आइसीयू से भी  कल ही उनका एक पत्र नीतीश कुमार के नाम से जारी हुआ था।  राजद से इस्तीफा देने वाले रघुवंश के सारे पत्र 10 सितंबर को ही लिखे हुए थे। शनिवार को फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम से जारी पत्र में उन्होंने वैशाली की चिंता की थी। पत्र में उन्होंने वैशाली के तालाबों को जल-जीवन-हरियाली अभियान से जोडऩे का आग्रह किया। साथ ही विश्व के प्रथम गणतंत्र के सम्मान में महात्मा गांधी सेतु रोड में हाजीपुर के पास भव्य द्वार बनाकर मोटे अक्षरों में विश्व का प्रथम गणतंत्र वैशाली द्वार अंकित कराने का आग्रह किया था।

दिनकर की वैशाली से संबंधित कविताओं का जिक्र

उन्होंने राष्ट्रकवि दिनकर की वैशाली से संबंधित कविताओं को जगह-जगह मोटे अक्षरों में लिखवाने का आग्रह किया था, ताकि आने-जाने वाले लोग दूर से ही पढ़ सकें। वहीं उन्होंने बज्जीनां सत अपरीहानियां धम्मा के अनुसार सातो धर्मो का उल्लेख जगह-जगह बड़ी दीवार पर पाली, हिंदी और अंग्रेजी में लिखवाने तथा वैशाली के उद्धारक जगदीशचंद्र माथुर की प्रतिमा लगाने का भी आग्रह किया था।

रघुवंश की आखिरी इच्छाएं

1. खेतों में भी हो मनरेगा से काम

रघुवंश मजदूरों की रोजगार गारंटी के सूत्रधार थे। कृषि कार्य में मजदूरों की कमी को देखते हुए वह चाहते थे कि मनरेगा के तहत सभी किसानों के खेतों में काम कराने की व्यवस्था की जाए। इसमें आधी मजदूरी सरकार की ओर से और आधी किसानों की ओर से देने का प्रावधान किया जाए। मुखिया को नोडल एजेंसी बनाया जाए।

2. बुद्ध का भिक्षापात्र बिहार आए

भगवान बुद्ध ने वैशाली छोड़ते समय स्मृति के रूप में एक भिक्षा पात्र दिया था, जो अभी अफगानिस्तान में है। रघुवंश इसकी वापसी चाहते हैं। लोकसभा में भी मुद्दा उठा चुके हैं। आश्वासन तो मिला था। किंतु समाधान नहीं। अपनी आखिरी इच्छा में रघुवंश ने नीतीश कुमार से आग्रह किया है कि पहल करें। भिक्षा पात्र को वापस लाएं।

3. गणतंत्र की जन्मभूमि का हो सम्मान

दुनिया में वैशाली की पहचान गणतंत्र की जननी के रूप में है। रघुवंश चाहते थे कि वैशाली को उसी रूप में सम्मान मिले। 26 जनवरी को मुख्यमंत्री खुद यहां राष्ट्रीय ध्वज फहराएं और राजकीय समारोह का आयोजन हो। संयुक्त बिहार में गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री रांची में ध्वज फहराते थे और राज्यपाल पटना में। रांची की जगह अब वैशाली को शामिल किया जाए।

 

Edited By: Sumita Jaswal