पटना [काजल]। रविवार से चार दिवसीय अनुष्ठान महापर्व छठ शुरू हो गया है। इस महापर्व नजदीक आते ही सबकी निगाहें पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड पर स्थित राबड़ी आवास पर खिंची चली जाती हैं। चूंकि छठ महापर्व लालू परिवार में हमेशा से धूमधाम से मनाया जाता रहा है। लेकिन, इस बार बदले माहौल में राबड़ी ने कह दिया है कि वे छठ तभी करेंगी, जब दोनों बेटे घर पर साथ रहेंगे।

राबड़ी के इस एेलान के बाद पटना के उस तबके को काफी दुख पहुंचा होगा जो लालू आवास पर होनेवाले छठ का साल भर इंतजार करता रहता है। छठ को लेकर राबड़ी आवास पर लोगों की भीड़ लगी रहती थी। लालू-राबड़ी की सातों बेटियां, दामाद तथा नाती-नातिन सहित सभी नाते-रिश्तेदार छठ की पूजा के लिए घर आ जाते थे । पूरे घर में रौनक रहती थी। पूजा का प्रसाद खाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी। सबको आदर के साथ प्रसाद दिया जाता था। अभी कुछ ही दिन पहले लालू-राबड़ी के घर पर दिवाली पर भी वो खुशी दिखाई नहीं दी जो हर साल दिखाई देती है। इसके बाद अब यहां से छठ की भी रौनक गायब हो चुकी है। राजद और खासतौर पर लालू के समर्थकों के लिए यह उदास करने वाला है।  

राबड़ी देवी खुद चार दिनों का छठ का अनुष्ठान पूरी श्रद्धा के साथ करती थीं। पूरे नियम-निष्ठा के साथ राबड़ी छठ का गेहूं सुखाना हो या प्रसाद बनाना हो, सारा काम खुद किया करती थीं। राबड़ी आवास छठ को लेकर चार दिन पहले से ही गुलजार रहा करता था। लालू यादव भी कहीं रहें, छठ में वो राबड़ी आवास पर ही होते थे। जब राबड़ी गंगा घाट जाकर छठ की पूजा करती थीं तो लालू खुद अपने सिर पर छठ की टोकरी लेकर पैदल जाते थे। 

छठ को लेकर लालू-राबड़ी के बेटे और बेटियों के बीच भी खासा उल्लास रहता था। लोगों को प्रसाद बांटना हो या छठ की खरीदारी करनी हो या प्रसाद का ठेकुआ बनाने में मां का हाथ बंटाना हो, सभी बेटियां मिलकर सारा काम कर लिया करती थीं।

 

लालू परिवार में साल 2016 में छठ नहीं हुआ था। लेकिन, राबड़ी देवी ने बेटों की शादी के बाद छठ व्रत करने की बात कही थी। राबड़ी देवी ने कहा था कि अब वे छठ व्रत अपने बेटों की शादी के बाद ही आरंभ करेंगी। इसके पीछे कारण यह बताया था कि बेटियों की शादी के बाद छठ में उनका हाथ बंटाने वाले घर के सदस्य कम हो गए हैं। ऐसे में बेटों की शादी के बाद बहुएं आ जाएंगी तो छठ की तैयारियों में आसानी रहेगी।

वहीं, पिछले साल भी हां-ना करते-करते आखिरकार राबड़ी ने छठ किया था। उन्होंने व्रत रखा था और विधि-विधान से छठ की पूजा की थी। तब लालू यादव भी घर में थे। लेकिन, राबड़ी की तबीयत को लेकर वो असमंजस में थे कि राबड़ी छठ कर सकेंगी या नहीं। राबड़ी ने छठ किया।

बदले माहौल में अब राबड़ी देवी की बहू आई भी, लेकिन छठ के पहले तलाक का झमेला खड़ा हो गया है।  जिससे राबड़ी आहत हैं और उनकी तबीयत भी नासाज है। दूसरे कि इस बार लालू यादव भी राबड़ी देवी के पास नहीं हैं, जिन्हें छठ की पूजा कर राबड़ी देवी सबसे पहले टीका लगाया करती थीं। वो लालू इस बार अस्पताल में बीमार पड़े हैं और बेटे की तलाक की जिद से आहत हैं।

पिछले साल दैनिक जागरण से बात करते हुए लालू यादव ने इस पर्व की विशेषता के बारे में बताते हुए कहा था कि इस पूजा में आधुनिकता का दिखावटी प्रदर्शन नहीं होता। उन्होंने हंसकर कहा था कि लोग कहते हैं कि मेरी वजह से छठ पूजा को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।

चार दिनों का यह व्रत दुनिया के सबसे कठिन व्रतों में से एक है। यह व्रत बड़े नियम और निष्ठा के साथ किया जाता है। व्रत का अनुष्ठान पहले दिन नहाय-खाय से शुरू होता है, जिसमें व्रती गंगा जल में छठ का पहला प्रसाद कद्दू-भात बनाती हैं और उसे अपने परिजनों और पास-पड़ोस के लोगों को बांटकर खुद ग्रहण करती हैं।

छठ के दूसरे दिन खरना का आयोजन होता है जिसमें व्रती पूरे दिन निर्जला रहकर शाम में खीर और पूरी या रोटी का भोग लगाती हैं और प्रसाद रूप में ग्रहण करती हैं। तीसरे दिन छठ का प्रसाद तैयार किया जाता है और सूप में उसे सजाकर शाम में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। पर्व के चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पर्व संपन्न होता है। भगवान सूर्य के लिए 36 घंटों का निर्जला व्रत स्त्रियां इसलिए रखती हैं ताकि उनके पति, बाल-बच्चे, समाज के लोग खुश रहें, निरोग रहें। 

Posted By: Kajal Kumari