राधा, सती और नंदी..., पटना के बड़ी पटनदेवी में पहुंचीं नन्हीं गायें; देखकर ठहर जा रहे श्रद्धालु
पटना के बड़ी पटनदेवी मंदिर में आंध्र प्रदेश से लाई गईं पुंगनूर नस्ल की तीन नन्हीं गायें (राधा, सती, नंदी) श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
HighLights
बड़ी पटनदेवी मंदिर में आंध्र प्रदेश से लाई गईं पुंगनूर गायें।
राधा, सती, नंदी नाम की ये गायें श्रद्धालुओं को खूब भा रही हैं।
छोटी कद की गायें गोपालन के प्रति लोगों को प्रेरित कर रही हैं।
अहमद रजा हाशमी, पटना सिटी। शक्तिपीठ बड़ी पटनदेवी मंदिर परिसर में इन दिनों तीन नन्हीं गायें श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले से लाई गईं पुंगनूर नस्ल की इन गायों को देखने के लिए मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु ठहर जा रहे हैं। खासकर बच्चे इनके साथ समय बिताने और इन्हें निहारने में काफी उत्सुकता दिखा रहे हैं।
भगवा और सफेद रंग वाली इन छोटी कद की गायों को मंदिर परिसर में दिनभर घूमते देखा जा सकता है। इनकी मौजूदगी श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के साथ गोपालन के प्रति भी प्रेरित कर रही है।
राधा, सती और नंदी है तीनों का नाम
शक्तिपीठ के महंत विजय शंकर गिरी ने बताया कि तीनों गायों के नाम भी रखे गए हैं। करीब एक वर्ष की बाछी का नाम राधा, सात महीने की बाछी का नाम सती और आठ महीने के बाछे का नाम नंदी रखा गया है।
मंदिर परिसर में इनकी देखभाल और खानपान की विशेष व्यवस्था की गई है। दिनभर घूमने के बाद शाम करीब चार बजे इन्हें मंदिर की गोशाला में ले जाया जाता है। इनके ठहरने के लिए शीशे की घेराबंदी वाला अलग स्थान भी बनाया गया है।
करीब दो फीट बताई जा रही ऊंचाई
महंत विजय शंकर गिरी के अनुसार, पुंगनूर नस्ल को दुनिया की छोटी कद वाली गायों की नस्लों में गिना जाता है। मंदिर में लाई गई इन गायों की ऊंचाई करीब दो फीट बताई गई है। इनके छोटे आकार के कारण श्रद्धालु खास तौर पर आकर्षित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि दोनों बाछियों के बड़े होने और अगले वर्ष बछड़ा देने के बाद दूध देने की उम्मीद है। फिलहाल तीनों की नियमित देखभाल और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

(गायाें को दुलारतीं मेयर सीता साहू।
बच्चों में बढ़ा आकर्षण
मंदिर परिसर में इन नन्हीं गायों को देखकर बच्चे खासे उत्साहित नजर आते हैं। श्रद्धालु भी इनके साथ तस्वीरें लेते और इनके बारे में जानकारी हासिल करते हैं।
मंदिर प्रबंधन का कहना है कि इनकी मौजूदगी से लोगों में गोपालन और पशुओं के प्रति स्नेह का भाव बढ़ाने का संदेश भी दिया जा रहा है।
महंत ने लोगों से अपील की कि वे अपनी क्षमता के अनुसार घर में इस छोटी नस्ल की गायों का पालन करें और पशुओं के प्रति प्रेम रखें। उन्होंने पुंगनूर नस्ल को धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी धरोहर बताया।
