पटना, बिहार ऑनलाइन डेस्‍क। बिहार के स्‍कूलों में अब हत्‍या भी हो जाए तो मीडिया वाले कैमरा नहीं चमका पाएंगे। अगर मीडिया को स्‍कूल के अंदर कैमरा क्लिक करना है तो इससे पहले स्‍कूल के प्रधानाध्‍यापक से इजाजत लेनी होगी। यह फरमान बिहार के दरभंगा (Darbhanga) जिले में कुशेश्‍वरस्‍थान (Kusheshwar Ashthan) प्रखंड के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (Block Education Officer) ने जारी किया है। यह आदेश 30 जनवरी को जारी किया गया है। इसके बाद इस आदेश की प्रति पूरे बिहार में वायरल हो गई। हमने इस वायरल पत्र की पड़ताल की तो दरभंगा जिले के वरीय अधिकारियों ने इसपर अनभिज्ञता जाहिर की, लेकिन बाद में प्रखंड शिक्षा कार्यालय से ऐसा पत्र जारी किए जाने की पुष्टि हुई। ऐसा आदेश बिहार में इंटर (BSEB Inter Exam) की परीक्षा शुरू होने से केवल दो दिन पहले ही जारी किया गया है। 1 फरवरी यानी आज से बिहार में इंटर की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं।

जानिए क्‍या लिखा है इस पत्र में

दरभंगा जिले के कुशेश्‍वर स्‍थान के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी यानी बीईओ (BEO) के हवाले से इस पत्र को प्रखंड के सभी संकुल संसाधन केंद्र और विद्यालयों को भेजा गया है। इस पत्र में कहा गया है कि विद्यालय परिसर में किसी भी मीडिया (प्रिंट एवं इलेक्‍ट्रॉनिक) की ओर से फोटो खींचने अथवा वीडियो रिकॉर्डिंग करने के लिए प्रधानाध्‍यापक की पूर्व अनुमति जरूरी होगी। अगर कोई बिना प्रधानाध्‍यापक की पूर्व अनुमति के फोटा या वीडियो रिकॉर्ड करता है तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। पत्र में इसे दंडनीय अपराध बताया गया है। लिहाजा ऐसा करने वाला जेल भी जा सकता है। हालांकि पत्र में यह नहीं बताया गया है कि ऐसा आदेश किस कानून के तहत जारी किया गया है, अथवा स्‍कूल में तस्‍वीर खींचने पर किस कानून के तहत दंडनीय अपराध निर्धारित किया गया है। पत्र में एक बात यह भी ध्‍यान देने योग्‍य है कि फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग पर प्रतिबंध केवल मीडिया के लिए लगाया गया है। इससे ऐसा लगता है कि मीडिया के अलावा अन्‍य लोग वहां तस्‍वीरें खींच सकते हैं।

शिक्षा विभाग के आदेश का दिया है हवाला

बीईओ ने अपने पत्र में बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के एक पत्र का हवाला दिया है। उनके मुताबिक यह पत्र 2018 में शिक्षा विभाग के अपर सचिव -सह- निदेशक गिर‍िवर दयाल सिंह ने जारी किया था। हमने बिहार सरकार के शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर ऐसे पत्र को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन इस वेबसाइट पर 2020 से पहले का कोई पत्र दिख नहीं रहा है। यह हाल तब है जब सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत किसी भी सरकारी रिकॉर्ड को कम से कम 20 साल तक सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही ऐसे सभी रिकॉर्ड को यथासंभव डिजिटल रूप में भी संधारित करना है, ताकि आम लोगों की उस दस्‍तावेज तक आसानी से पहुंच हो सके।

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