पटना [जेएनएन]। भारत के राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने आधिकारक ट्विटर अकाउंट से भोजपुरी में ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में राष्‍ट्रपति ने नौजवानों को संबोधित करते हुए कहा है कि उनका भविष्‍य उनके ही हाथों में है।
युवाओं को संबोधित करते हुए राष्‍ट्रपति ने लिखा है कि युवाओं का भविष्‍य उनके हाथ में है। वे अपने पर भरोसा कर अपने पैरों पर खड़ा होकर आगे बढ़ें। अगर वे शक्तिशाली होंगे तो देश भी शक्तिशाली होगा। हिन्द महासागर उन्‍हें बुला रहा है। ब्लू इकॉनोमी की ताकत उनके हाथों में है। भारत उनके साथ है।

जानिए, क्‍या है ब्‍लू इकॉनोमी
ब्‍लू इकॉनोमी कॉन्‍सेप्‍ट को पहली बार सन् 2010 में गुंटर पॉली की किताब 'The Blue Economy: 10 years, 100 innovations, 100 million jobs' में महत्‍व मिला। ब्लू इकोनॉमी के अंतर्गत अर्थव्यवस्था समुद्री क्षेत्र पर आधारित होती है। 'ब्लू ग्रोथ' में संसाधनों की कमी और कचरे के निपटारे की समस्या का समाधान करने की कोशि‍श की जाती है। इसमें पर्यावरण को ध्‍यान में रखकर व्‍यवसाय का मॉडल तैयार किया जाता है तथा मानव कल्‍याण पर केंद्रित टिकाऊ विकास को सुनिश्चित किया जाता है।
सरकार लंबी समुद्री सीमाओं का भरपूर इस्तेमाल करते हुए देश को 'ब्लू इकोनॉमी' के तौर पर खड़ा करना चाहती है। इसमें रक्षा और आंतरिक सुरक्षा को जोड़ने के लिए दीर्घकालीन विजन पर काम हो रहा है। भारत की समुद्री सीमा 7500 किलोमीटर लंबी है और 20 लाख वर्ग किलोमीटर का एक्‍सक्‍लूसिव इकॉनोमिक जोन भी है। इसके अलावा 1300 से अधिक द्वीप हैं। नदियों का बड़ा संजाल तो है हीं। इनका उपयोग ब्‍लू इकॉनोमाी के तहत किया जाना है।
ब्लू इकोनॉमी के तहत मुख्य फोकस खनिज पदार्थों समेत समुद्री उत्पादों पर है, पर इसमें नौवहन जैसी समुद्री गतिविधियां भी शामिल हैं। दरअसल, इस कॉन्‍सेप्‍ट का अर्थ बहुत व्‍यापक है।

By Amit Alok