पटना [अरविंद शर्मा]। प्याज के दाम पर बिहार में भी खूब राजनीति हो रही है। प्याज के भाव पर सड़कों पर सियासत के साथ ही सत्ता पक्ष की परतें उतारी जा रही हैं। विपक्ष कालाबाजारी की तोहमत लगा रहा है तो सत्ता पक्ष पप्पू यादव के सस्ते दाम पर प्याज बेचने को नौटंकी करार दे रहा है। हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप के बीच आगे के लिए भरपूर इंतजाम की कोशिश जारी है। 

प्याज उपजाने में देश में बिहार चौथे स्थान पर है। यहां महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश एवं कर्नाटक के बाद सबसे ज्यादा प्याज का उत्पादन होता है। यूपी से भी ज्यादा। कृषि विभाग की पिछले चार वर्षों की रिपोर्ट बताती है कि प्याज के उत्पादन में बिहार में एक लाख 29 हजार मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है।

2019 में प्याज का कुल उत्पादन 14 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा है। रकबा भी आठ हजार हेक्टेयर बढ़ा है। सबसे बड़ी दिक्कत भंडारण की है। अभी प्रदेश में मात्र 50 हजार मीट्रिक टन प्याज भंडारण की क्षमता है। इसे बढ़ाना है। तैयारी की जा रही है। 

उत्पादन एवं उत्पादकता स्तर पर भी काम शुरू कर दिया गया है। चंडी में प्याज के उन्नत बीज तैयार कर किसानों को देने की योजना तैयार कर ली गई है। तकनीकी सहयोग भी दिया जाएगा।

बिहार में प्याज की खेती मुख्यत: रबी मौसम में की जाती है, जबकि अग्र्रणी राज्यों में खरीफ में भी उत्पादन होता है। प्याज के रकबे में विस्तार और खरीफ में भी खेती के लिए राज्य सरकार विशेष योजना बना रही है। इसके तहत किसानों को प्रोत्साहन के साथ-साथ स्थिर दाम, भंडारण, बाजार एवं प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि के लिए कार्यक्रम चलाए जाएंगे। 

क्यों होती है कमी 

बिहार के बाजार का ट्रेंड बताता है कि प्रत्येक दो-तीन साल पर प्याज गायब हो जाता है। दरअसल किसान जिस वर्ष प्याज की खेती करते हैं और उत्पादन ज्यादा हो जाता है तो उन्हें औने-पौने दाम में बेचना पड़ता है। लिहाजा अगले साल प्याज से मोह भंग हो जाता है। कोई और फसल लगा देते हैं। खेती कम तो बाजार में किल्लत तय हो जाती है। दाम बढ़ जाना स्वाभाविक है। 

लागत का आधा अनुदान 

प्याज की पर्याप्त खेती और किसानों के मुनाफे को ध्यान में रखते हुए बिहार में भंडारण क्षमता बढ़ाई जा रही है। इसके लिए प्याज भंडारण गृह निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा। एक इकाई की लागत 1.75 लाख रुपये आती है। सरकार इसपर 50 फीसद अनुदान देने जा रही है। अर्थात एक भंडारण गृह बनाने पर किसान को साढ़े 87 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। 

यहां होता है उत्पादन 

नालंदा, पटना, पश्चिमी चंपारण, कटिहार, मुजफ्फरपुर, वैशाली, शेखपुरा आदि। दायरा बढ़ाना है। कुछ नए जिलों को भी शामिल करने की तैयारी है। 

बिहार में प्याज की रफ्तार

वर्ष : क्षेत्रफल (हजार हेक्टेयर): उत्पादन (लाख मीट्रिक टन)

2015-16 : 54.03 : 12.74

2016-17 : 54.06 : 12.49

2017-18 : 53.77 : 12.67

2018-19 : 62.08 : 14.03 

 

Posted By: Kajal Kumari

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