पटना [जेएनएन]। नागरिकता संशोाधन कानून (CAA) पर केंद्र की नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार को राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सहयोगी दलों जनता दल यूनाइटेड (JDU) व लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) का सहयोग मिला था। लेकिन राष्‍ट्रीय नागरिक रजिस्‍टर (NRC) के मामले में ऐसा होता नहीं दिख रहा। एनआरसी को लेकर एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग़ पासवान (Chirag Paswan) ने कहा है कि गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) को इसे लेकर आशांकाओं पर स्थिति साफ करनी चाहिए। वहीं, शनिवार को जेडीयू की तरफ से मंत्री अशोक चौधरी (Ashok Chaudhary) ने कहा कि बिहार में एनआरसी को लागू नहीं होने देंगे, जिसकी घोषणा मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले ही कर दी है, जबकि जेडीयू उपाध्‍यक्ष प्रशांत किशाेर (PK) ने पार्टी सुप्रीमो नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से मुलाकात के अगले दिन रविवार को फिर ट्वीट कर इसकी तुलना नोटबंदी (Note Ban) से कर दी है।  

चिराग बोले- आशंकाएं दूर करें अमित शाह

एलजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि एनआरसी को लेकर सामने आ रही आशंकाओं पर केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को स्थिति स्‍पष्‍ट करनी चाहिए। एनआरसी किसी को बेवजह परेशान करने का साधन नहीं होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एनआरसी पर संसद (Parliament) में बिल लाने पर एलजेपी पहले उसे देखेगी, फिर देश व बिहार के हित में फैसला लेगी। चिराग पासवान ने यह भी कहा कि शरणार्थी और घुसपैठिया में फर्क होता है।

एनआरसी के विरोध में जेडीयू

चिराग पासवान का यह बयान इस मायने में महत्‍वपूर्ण है कि इसपर एनडीए में बीजेपी के दूसरे सहयोगी जेडीयू का विरोध भी सामने आ चुका है। जेडीयू नेता और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा है कि उनकी पार्टी एनआरसी के खिलाफ है। अशोक चौधरी ने ये बात मुख्‍यमंत्री व पार्टी सुप्रीमो नीतीश कुमार के हवाले से कही।

जेडीयू के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने भी सीएबी पर सवाल खड़े करते हुए एनआरसी का विरोध किया है।

प्रशांत किशोर का इस्‍तीफा नामंजूर

खास बात यह भी है कि सीएबी और एनआरसी के मुद्दों पर प्रशांत किशोर ने पार्टीलाइन से बाहर जाकर विरोध में बयान दिए। इसके बाद पार्टी के अंदर से उनके खिलाफ बयानबाजी होने लगी। बीजेपी ने भी उन्‍हें आड़े हाथों लिया। फिर, प्रशांत किशोर ने शनिवार को मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। बताया जाता है कि उन्‍होंने पार्टी से अपना इस्‍तीफा सौंपा, जिसे नीतीश कुमार ने स्‍वीकार नहीं किया।

एनआरसी की नोटबंदी से की तुलना

इसके बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि सीएबी से विरोध नहीं, विरोध एनआरसी व नागरिकता संशोधन कानून को मिलकार कानून के दुरुपयोग से है। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि वे अपने स्‍टैंड पर कायम हैं। इसके बाद रविवार को भी उन्‍होंने ट्वीट कर एनआरसी की तुलना नोटबंदी से कर दी। उन्‍होंने लिखा कि इसका खामियाजा गरीबों को भगुतना पड़ेगा।

लगाए जा रहे राजनीतिक कयास

नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद प्रशांत किशोर के इस बयान को लेकर राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। ये कयास इसलिए भी तेज हैं, क्‍योंकि इसके पहले शनिवार को भागलपुर में बिहार के भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने भी कहा था कि सीएबी से मुस्लिम समुदाय को कोई नुकसान नहीं होगा, यह उनके खिलाफ नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा। इसकी घोषणा मुख्यमंत्री ने पहले ही कर दी है।

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