पटना [राज्य ब्यूरो]। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद बिहार में सियासी दलों के सुर-ताल बिगड़ गए हैं। कुछ ने गहरी चुप्पी ओढ़ ली है तो कुछ मुखर हैं। किसी-किसी दल के सिर्फ प्रवक्ता बोल रहे हैं, जबकि शीर्ष नेताओं ने खुद को किनारा कर लिया है। सबसे आश्चर्यजनक स्थिति जनाधिकार पार्टी (JAP) के मुखिया राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (Pappu Yadav) की है, जहां घर में ही दो तरह की विचारधारा है।

विलंब से बोले तेजस्‍वी, लालू परिवार ने अन्‍य सदस्‍य मौन

बिहार के सबसे बडे विपक्षी दल राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) की बात करें तो लालू परिवार (Lalu Family) से केवल तेजस्‍वी यादव (Tejashwi Yadav) का बयान आया है। तेजस्‍वी ने विलंब से मंगलवार को ट्वीट कर अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने के विरोध में बयान दिया। इसके पहले पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह, शिवानंद तिवारी, विधायक भाई वीरेंद्र एवं शक्ति सिंह यादव ने विरोध में बयान जारी किया था, लेकिन मंगलवार तक लालू परिवार ने मौन आेढ़ रखा था। अभी भी लालू परिवार के किसर अन्‍य सदस्‍य ने कोई बयान नहीं दिया है।

पार्टी लाइन से अलग कांग्रेस की रंजीत रंजन का बयान

सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व सांसद पप्पू यादव की पत्नी और कांग्रेस (Congress) की वरिष्ठ नेता रंजीत रंजन (Ranjit Ranjan) के बयान की हुई। उन्हें सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के निकट माना जाता है, लेकिन उन्होंने भी ज्योतिरादित्य सिंधिया और जनार्दन द्विवेदी की तरह पार्टी लाइन से अलग बयान दिया और अनुच्‍छेद 370 हटाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इसे तो हटना ही था, क्योंकि यह व्यवस्था देश हित में नहीं थी।

रंजीत का यह बयान इसलिए भी मायने रखता है कि बिहार में विधान पार्षद प्रेमचंद मिश्रा को छोड़कर प्रदेश कांग्रेस के किसी वरिष्ठ नेता ने मुंह खोलना उचित नहीं समझा है। यहां तक कि प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा भी नहीं।

अनुच्‍छेद 370 के मामले में एकमत नहीं पति-पत्‍नी

खास बात यह भी है कि अनुच्‍छेद 370 को लेकर रंजीत रंजन का बयान पति पप्‍पू यादव के बयान से अलग रहा। पप्‍पू ने पहले अनुच्‍छेद 370 हटाने का खुलकर विरोध किया तो पत्नी रंजीत रंजन ने समर्थन। हालांकि, बाद में पप्पू यादव के स्वर बनते-बिगड़ते रहे। आठ अगस्त को केंद्र सरकार के फैसले को हिटलरशाही करार देने के महज दो दिनों बाद उन्होंने भरपाई करने की कोशिश की और कहा कि वे अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोधी नहीं, लेकिन इसके तरीके के विरोध में हैं।

केवल विपक्षी खेमे में ही नहीं असमंजस की स्थिति

असमंजस की स्थिति केवल विपक्षी खेमे में ही नहीं रही, राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने भी वक्त की नजाकत को समझते हुए मुख्यधारा की सियासत को स्वीकार कर लिया। जेडीयू ने अनुच्छेउ 370 हटाने का विरोध किया तथा इस विधेयक के खिलाफ संसद से वॉक आउट किया, लेकिन बाद में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह ने कहा कि अनुच्‍छेद 370 हटाने का मामला अब संवैधानिक हो गया है।

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Posted By: Amit Alok

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