पटना [काजल]। रमज़ान के मौक़े पर बिहार में इफ्तार के बहाने राजनीति अपने चेहरे बदलती रहती है। जहां पिछली बार के दोस्तों ने साथ मिलकर इफ्तार पार्टी मनाई थी वही दोस्त इसबार एक-दूसरे के राजनीतिक शत्रु बने हुए हैं। वक्त बदला, लोग बदले, दल बदले, पार्टियां बदलीं और इस बार भी बदले माहौल में तमाम राजनीतिक दल अपनी ताकत और जोर आजमाईश दिखाने में लगे हैं। माहे रमजान वही है, लेकिन साल बदल गया है, दोस्त बदल गये हैं, चेहरे बदल गए हैं।

2016 की इफ्तार पार्टी जिसमें लालू-नीतीश ने संभाली एक-दूसरे की टोपी 

2016 की इफ्तार पार्टी की बात करें तो लालू और नीतीश इस तरह  खुलकर गले मिले थे थे कि जैसे कभी जुदा ही ना होंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास एक अणे मार्ग में दावत-ए-इफ्तार का आयोजन हुआ था जिसमें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद, पूर्व सीएम राबड़ी देवी, तेजस्वी  यादव व तेजप्रताप एक साथ पहुंचे थे।

बड़े भाई लालू यादव ने पहले छोटे भाई नीतीश की टोपी संभाली फिर छोटे भाई नीतीश ने भी अपना फर्ज निभाया, उन्होंने भी बड़े भाई को बड़े प्यार से टोपी पहनाई। 

 

2017 की इफ्तार पार्टी, पड़ गई थी रिश्तों में खटास

राजद की तरफ से राबड़ी आवास, 10 सर्कुलर रोड में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था जिसमें महागठबंधन के तमाम नेता पहुंचे थे। पार्टी में नीतीश कुमार के पहुंचने पर सबने उनका जोरदार स्वागत किया था। नीतीश कुमार बैठे तो लालू की बगल में थे, लेकिन बातें लगातार उस वक्त कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और राज्य के शिक्षामंत्री रहे अशोक चौधरी से करते रहे, जिससे उसी वक्त महागठबंधन की खटास सबको नजर आई थी। 

वजह ये रही कि महागठबंधन में रहते हुए नीतीश कुमार ने एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार तत्कालीन बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को अपना समर्थन देने का एेलान किया था, जिससे लालू नाराज थे। लालू ने दिल्ली से लौटने के क्रम में भी कहा था कि वे पटना पहुंचकर नीतीश को समझाएंगे कि वे अपने फैसले पर एक बार फिर सोचें।

बाद में नीतीश ने अपने फैसले पर अडिग रहने की बात दुहराते हुए यहां तक कह दिया कि विपक्ष ने मीरा कुमार को हारने के लिए राष्‍ट्रपति प्रत्‍याशी बनाया है। इसके जवाब में लालू प्रसाद के पुत्र तेजस्‍वी यादव ने कहा कि राजद के लोग अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करते।

इसी मुद्दे को लेकर राजद नेताओं की नाराजगी भी देखने को मिली है। भाई वीरेंद्र और राजद के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने तो यहां तक कहा कि नीतीश को बीजेपी से इतना ही प्रेम है तो चले क्यों नहीं जाते? सबको धोखा क्यों दे रहे हैं? फिर परिणाम भी यही हुआ कि मतभेदों के बाद महागठबंधन टूट गया और नीतीश कुमार एनडीए में शामिल हो गए।

2018 में दल बदल गए, दिल बदल गए, जो दोस्त थे वो दुश्मन हो गए

इस साल वही माहे रमजान है वही इफ्तार की पार्टी हो रही है, लेकिन इसी इफ्तार पार्टी में जो कल राजनीतिक दुश्मन थे साथ बैठकर व्यंजनों का स्वाद ले रहे हैं और दोस्त रहे लोग राजनीतिक दुश्मन बन कटाक्ष कर रहे हैं। लेकिन खटास इस बार भी दोस्तों के बीच दिखनी शुरू हो चुकी है।

इस बार भी चेहरे की सियासत और सीट शेयरिंग को लेकर बिहार एनडीए में भीतर-ही-भीतर आग सुलग रही है लेकिन ऊपर से यह दिखाने की कोशिश हो रही कि सबकुछ ठीक है। इसे जताने के लिए रमजान का यही पाक महीना और विभिन्न पार्टियों का इफ्तार का आयोजन है।

रामविलास की इफ्तार पार्टी, नीतीश-सुशील को कहा-राम, लक्ष्मण

इस कड़ी में सबसे पहले रामविलास पासवान ने इफ्तार की पार्टी दी थी जिसमें भाजपा नेता और जदयू नेता पहुंचे थे। रामविलास पासवान ने अपने आवास पर आयोजित पार्टी में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी की जोड़ी को राम और लक्ष्मण की जोड़ी की बताया और कहा कि एनडीए में कोई मतभेद नहीं है। 

 

बता दें कि लोजपा की इफ्तार पार्टी और साथ ही भाजपा की इफ्तार पार्टी में रालोसपा सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा शामिल नहीं हुए थे जिसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए गए।

रालोसपा से हो रही खट-पट, तेजस्वी ने दिया अॉफर

इस घटना के बाद राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने रालोसपा प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा से कहा कि वह राजग छोड़कर उनकी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो जाएं, क्योंकि उनकी एनडीए गठबंधन में कोई पूछ नहीं है। हालांकि कुशवाहा ने यह निमंत्रण ठुकरा दिया और इस बात पर जोर दिया कि वह राजग में हैं और नरेंद्र मोदी को 2019 के लोकसभा चुनाव में फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए काम कर रहे हैं।

उसके बाद राष्ट्रीय लोक समता पार्टी की ओर से रविवार को इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें रालोसपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री नेता सुशील कुमार मोदी समेत लोजपा के नेताओं को आमंत्रित किया था। लेकिन उनकी इफ्तार पार्टी में कोई नेता नहीं पहुंचा।  

रालोसपा प्रवक्ता अभयानंद सुमन ने कहा कि बिहार प्रदेश भाजपा प्रमुख नित्यानंद राय और भाजपा नेता देवेश कुमार इफ्तार कार्यक्रम में पहुंचे लेकिन जदयू और लोजपा से कोई भी नहीं आया।

जीतनराम की इफ्तार पार्टी, दिखी विपक्षी एकता

वहीं मंगलवार को हम के अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने इफ्तार पार्टी दी थी जिसमें राजद और कांग्रेस के ज्यादातर नेता पहुंचे थे और विपक्षी एकता की ताकत दिखी थी। 

जदयू-राजद की आज है इफ्तार पार्टी

अब इसके बाद जेडीयू और राजद ने भी बुधवार को इफ़्तार पार्टी का आयोजन किया है। जदयू की इफ्तार पार्टी जहां पटना के हज भवन में आयोजित है तो वहीं राजद की तरफ से इफ्तार पार्टी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आवास देशरत्न मार्ग में आयोजित है, जहां राजद-हम और कांग्रेस के नेताओं के साथ शॉ टगन भाजपा नेता शत्रुघ्न सिन्हा भी पहुंचे हैं, जिन्हें मीसा भारती ने पार्टी ज्वाइन करने का अॉफर दिया है।

हज भवन में होने वाली जदयू की इस इफ़्तार पार्टी के आयोजक हाल ही में कांग्रेस छोड़ कर जदयू में आने वाले अशोक चौधरी हैं। उन्होंने बताया कि जेडीयू की इफ़्तार पार्टी में तमाम राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को आने का निमंत्रण दिया गया है। पार्टी में रामविलास पासवान पहुंचे हैं।

राजनीतिक दल के निमंत्रण पर अशोक चौधरी ने बताया कि तमाम पार्टी के नेता इस मौक़े पर आएंगे। रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के आने के सवाल पर उन्होंने बताया कि सभी दलों के नेताओं को बुलाया गया है और साथ ही हमारे एनडीए के सहयोगियों को भी इस इफ्तार पार्टी का न्यौता भेजा गया है।

चौधरी ने कहा जेडीयू हर साल रमजान के मौके पर इफ्तार पार्टी का आयोजन करता रहा है। चूंकि ये समय पाक महीना रमजान का है, ऐसे में इस मौके पर हमें सियासत की जगह इबादत पर ही ध्यान देना चाहिये। दूसरी तरफ राजद की इफ्तार पार्टी पर भी सबकी निगाहें हैं। बता दें कि जदयू की इफ्तार पार्टी में शामिल होने लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान भी पटना पहुंच रहे हैं।

पार्टी में दिखेगा राजनीतिक समीकरण!

इस बार की इफ्तार पार्टी में क्या राजनीतिक समीकरण तय होंगे कौन कितना प्रभावशाली होगा किस नेता की इफ्तार पार्टी में कौन पहुंचा और कौन नहीं पहुंचा। इसका लेखा-जोखा आने वाले चुनाव के लिए भी होगा। बता दें कि विपक्षी गठबंधन में तो सीट शेयरिंग को लेकर मतभेद अबतक नहीं दिखा लेकिन इफ्तार पार्टी के भोज का स्वाद एनडीए में दिख रहा है। 

 

Posted By: Kajal Kumari