पटना। अंटार्कटिका और अलास्का में बर्फ के नीचे कोयले और पेट्रोलियम का प्रचुर भंडार है। इस पर सभी देशों की नजर है। भारत भी यहां की खनिज संपदा को खोजने के लिए दो स्टेशन स्थापित कर चुका है। उक्त बातें गुरुवार को नालंदा खुला विश्वविद्यालय के 'पॉपुलर' लेक्चर में यूनिवर्सिटी ऑफ मेनसिटो, यूएसए के भूतपूर्व प्रोफेसर डॉ. अखौरी अच्युतानंद सिन्हा ने कहीं। उन्होंने बताया कि 1972 में सात अन्य वैज्ञानिकों के साथ अनुसंधान प्रारंभ किया था। संयुक्त राज्य अमेरिका ने माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तापमान पर शोध के लिए काफी सुविधाएं उपलब्ध कराई थीं। उनके बेहतर कार्य को देखते हुए एक माउंटेन उनके नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण असंतुलन का सबसे अधिक प्रभाव ध्रुवीय भालुओं पर पड़ रहा है। बर्फ की परत पतली होने के कारण भालुओं का वास स्थल घटता जा रहा है। एनओयू के कुलपति प्रो. आरके सिन्हा ने कहा कि अंटार्कटिका क्षेत्र में खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में हैं। इसके शोधन के लिए कई देश आगे आए हैं। इस क्षेत्र पर किसी एक देश का अधिकार नहीं है। कार्यशाला का संचालन एनओयू की सहायक प्राध्यापक किरण पांडेय तथा धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव एएन पांडेय ने किया।

By Jagran