PMCH पटना में बच्चों के इलाज के लिए बढ़ेंगे बेड: 58 बेड का 'नीकू' और 20 बेड का 'पीकू' होगा तैयार
पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में नवजात और गंभीर बच्चों के इलाज की क्षमता बढ़ाई जाएगी।

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल। (फाइल फोटो)
HighLights
पीएमसीएच में बच्चों के इलाज की क्षमता में वृद्धि होगी।
58 बेड का नीकू और 20 बेड का अलग पीकू बनेगा।
गंभीर नवजात और बच्चों को बेहतर चिकित्सा मिलेगी।
जागरण संवाददाता, पटना। पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में नवजात और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज की सुविधा को और मजबूत किया जाएगा।
अस्पताल में अब 58 बेड का नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (नीकू) और 20 बेड का अलग पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) होगा। इसके लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद गंभीर नवजात और बच्चों के लिए कुल 78 बेड उपलब्ध होंगे।
पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान में अस्पताल में 38 बेड का नीकू और 20 बेड का पीकू संचालित है।
दोनों यूनिट फिलहाल पांचवें तल पर हैं। नई व्यवस्था के तहत मौजूदा 38 बेड के नीकू और 20 बेड के पीकू को पुनर्गठित किया जाएगा। इसके बाद 58 बेड का नीकू तथा 20 बेड का अलग पीकू संचालित होगा।
गंभीर बच्चों को मिलेगी बेहतर सुविधा
अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बीमार नवजात और गंभीर बच्चों को इलाज के लिए लाया जाता है। कई बच्चों को सांस लेने में परेशानी, संक्रमण, जन्म के समय कम वजन तथा अन्य गंभीर बीमारियों के कारण गहन चिकित्सा की आवश्यकता होती है।
बेड की संख्या बढ़ने से ऐसे मरीजों को समय पर गहन चिकित्सा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। अधीक्षक ने बताया कि नीकू में गंभीर रूप से बीमार नवजातों और पीकू में गंभीर स्थिति वाले बड़े बच्चों के उपचार की व्यवस्था रहेगी।
दोनों इकाइयों को अलग-अलग व्यवस्थित किए जाने से मरीजों की जरूरत के अनुसार उपचार और निगरानी की सुविधा बेहतर हो सकेगी।
नई व्यवस्था के लिए तैयारी शुरू
पीएमसीएच प्रशासन की ओर से इसी महीने के अंत तक 500 बेड के एक नए भवन में कार्य आरंभ करने की तैयारी की जा रही है। नई व्यवस्था के लिए वार्ड, उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों को लेकर तैयारी की जा रही है।
बेड बढ़ने से गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता भी कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अस्पताल प्रशासन का जोर बच्चों के लिए गहन चिकित्सा सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और सुगम बनाने पर है।
