सुपौल [राजेश कुमार]। पशु-पक्षी प्रेम का यह नायाब उदाहरण है। सुपौल के कर्णपुर में एक उल्लू पक्षी के घायल हो जाने के बाद स्थानीय लोगों ने न केवल उसका इलाज कराया, बल्कि मौत हो जाने पर विधि-विधान से अंतिम संस्कार भी किया। इसके बाद गुरुवार को उसकी आत्‍मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म का आयोजन किया, जिसमें इलाके के लोग उमड़ पड़े।
खास बात सह कि यह यहां की पहली घटना नहीं है इससे पहले भी लोगों ने एक सांड का अंतिम संस्कार कर श्राद्धकर्म किया था।
मंदिर में मिला था घायल उल्‍लू
जानकारी के अनुसार स्थानीय राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में एक घायल उल्लू गिर गया। लोगों की नजर उसपर पड़ी तो उसकी सेवा करनी शुरू की। ग्रामीणों ने पशु चिकित्सक से इलाज भी कराया। लेकिन, वह बच नहीं सका। इसके बाद ग्रामीणों ने नव वस्त्र देकर मंदिर परिसर में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
लोगों ने कहा, जीवों के प्रति दयाभाव उनका कर्तव्‍य
बहरहाल स्थानीय निवासी पितांबर पाठक, अमरेश पाठक, संजीव कुमार पाठक माधव जी, जयप्रकाश चौधरी, मिथिलेश कुमार झा, रामेश्वर पाठक, भानू पाठक आदि ने बताया कि उल्लू को लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। वैसे भी सभी जीवों के प्रति दया भाव रखना मनुष्य का कर्तव्य है।
इस संबंध में पर्यावरणविद् भगवानजी पाठक ने कहा कि देखरेख के अभाव में पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो गईं। पहले गोरैया घर-घर पाई जाती थी, अब देखने को नहीं मिलती। उल्लू भी विलुप्त हो रहा पक्षी है। उसके लिए यह सम्मान तारीफ के लायक है।

Posted By: Amit Alok

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