नलिनी रंजन, पटना: पटना विश्वविद्यालय एवं पटना साइंस कॉलेज का अतीत काफी गौरवशाली एवं पुराना है। अपनी प्रतिभा के बल पर यहां के छात्र देश-विदेश में परचम लहरा रहे हैं। हालांकि, अब इसका वर्तमान पूर्व जैसा नहीं रहा। कई परास्नातक विभागों एवं कॉलेजों की प्रयोगशालाओं में महंगे उपकरण तो हैं पर छोटी-मोटी खराबी के कारण ये वर्षों से बेकार पड़े हैं। लाखों की मशीन चंद हजार रुपये के खर्च से ठीक हो सकती है, मगर ठीक नहीं होने से छात्र एवं शोधार्थी आवश्यक ज्ञान से वंचित हो रहे हैं। फंड के अभाव में लैब में छात्रों को खुद राशि खर्च कर कई तरह के केमिकल्स की खरीदारी करनी पड़ रही है। 

पटना विवि के पीजी बायोकेमिस्ट्री विभाग की लैब में कई शोध ऐसे भी हुए हैं जिनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर हुई है। लेकिन, विवि की ओर से फंड व संसाधन की अनदेखी के कारण अभी परेशानी की स्थिति बनी हुई है। बायोकेमिस्ट्री विभाग के नीरज कुमार, शोध छात्रा बेनजीर फातिमा, प्रियंका कुमारी आदि ने बताया कि विभाग का यूवी स्पेक्ट्रो फोटोमीटर, शेकर इंक्यूबेटर मशीनें खराब हैं। इनकी कीमत लाखों में है। इन्हें महज 10-15 हजार रुपये खर्च कर बनवाया जा सकता है। नहीं बनने के कारण शोध गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। आवश्यक परिस्थिति में राशि खर्च कर निजी लैब से जीन सीक्वेंसिंग करवानी पड़ती है। खर्च शोध छात्रों को वहन करना पड़ता है। केमिकल्स के लिए भी छात्रों को ही राशि लगानी पड़ती है। 

सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी लैब बेकार

पटना साइंस कॉलेज में वर्ष 2012-13 में केंद्रीय बायोटेक्नोलॉजी मंत्रालय की ओर से सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी लैब बनवाई गई। इसके लिए मंत्रालय ने पांच करोड़ रुपये भी दिए थे। तकनीकी स्टाफ नहीं होने के कारण यह वर्षों से बंद है। इस कारण शोधार्थियों को लाभ नहीं मिल रहा है। बायोकेमिस्ट्री विभाग में पीसीआर मशीन तो है, लेकिन किट नही रहने से वो कार्यरत नहीं है।

विवि से आग्रह किया जा रहा 

पटना साइंस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसआर पद्मदेव इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी लैब के लिए कई वर्षों से तकनीकी अधिकारी की नियुक्ति के लिए विवि से आग्रह किया जा रहा है। विश्वविद्यालय को इसके लिए नियुक्त होने वाले कर्मी-अधिकारी का वेतन आंतरिक स्रोत से भी देने का भरोसा दिया गया है। इसके बावजूद विवि की ओर से स्वीकृति नहीं दी जा रही है। बायोकेमिस्ट्री लैब के लिए राशि के अभाव को लेकर विवि के अधिकारियों से बात की जाएगी।

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