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पटना में लेप्टोस्पायरोसिस की दस्तक, NMCH में पांच दिन में दूसरी महिला पॉज‍िट‍िव; कैसे फैलती है यह बीमारी?

Published: Tue, 18 Aug 2026 02:21 PM (IST)

पटना के एनएमसीएच में पांच दिनों के भीतर लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण के दो मामले सामने आए हैं, जिसमें एक 31 वर्षीय ...और पढ़ें

एनएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी लैब में हुई जांच। सांकेत‍िक तस्‍वीर

एनएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी लैब में हुई जांच। सांकेत‍िक तस्‍वीर

HighLights

  1. एनएमसीएच में पांच दिनों में लेप्टोस्पायरोसिस का दूसरा मामला सामने आया।

  2. यह संक्रमण जंगली चूहों के मल-मूत्र से मनुष्यों में फैलता है।

  3. बिहार में एनएमसीएच एकमात्र सरकारी अस्पताल, लेप्टोस्पायरोसिस जांच की सुविधा।

जागरण संवाददाता, पटना सिटी। नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) के माइक्रोबायोलाजी विभाग में विकसित टाक्सोप्लाज्मा लैब में सोमवार को लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण के चार संदिग्ध मरीजों के नमूनों की जांच की गई।

इनमें खुशरूपुर निवासी 31 वर्षीय महिला की रिपोर्ट पाजिटिव मिली है। यह जानकारी विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने दी। अस्पताल में पांच दिनों के भीतर लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की दूसरी महिला मरीज मिलने की चर्चा रही।

विभागाध्यक्ष ने बताया कि जंगली चूहों के मल-मूत्र के संपर्क में आने से मनुष्यों में फैलने वाले लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की आइजीएम जांच में महिला की रिपोर्ट पाजिटिव आई है। वह औषधि विभाग में भर्ती है और उसका उपचार जारी है।

इससे पहले 13 अगस्त को औषधि विभाग के वार्ड में भर्ती अगमकुआं निवासी 48 वर्षीय महिला की भी इसी लैब में जांच की गई थी। उसकी रिपोर्ट भी लेप्टोस्पायरोसिस आइजीएम के लिए पाजिटिव मिली थी।

बिहार में केवल एनएमसीएच में जांच की सुविधा

डॉ. संजय कुमार ने बताया कि बिहार के सभी सरकारी अस्पतालों में एनएमसीएच में ही लेप्टोस्पायरोसिस की जांच की सुविधा उपलब्ध है।

अस्पताल को इस संक्रमण के लिए निगरानी केंद्र भी बनाया गया है। किसी भी सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज में लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण पाए जाने पर एनएमसीएच में निशुल्क जांच कराई जा सकती है।

उन्होंने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस चूहे और अन्य संक्रमित पशुओं के मल-मूत्र, दूषित पानी अथवा संक्रमित मिट्टी के संपर्क में आने से मनुष्यों में फैल सकता है।

बाढ़ के दौरान बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा

विभागाध्यक्ष ने बताया कि बरसात के मौसम में जब बाढ़ का पानी गांवों में प्रवेश करता है, तो जंगली चूहे सुरक्षित स्थान की तलाश में शहरों और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर चले आते हैं। ऐसे में इनके माध्यम से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

औषधि विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अजय कुमार सिन्हा ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस आइजीएम संक्रमण को लेकर चिकित्सकों और मरीजों के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। वर्तमान में पाॅजिटिव मिली महिला मरीज की हालत ठीक है और उसका उपचार चल रहा है।