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'कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया' से 'ये शाम मस्तानी' तक, पटना में सजी सुरों की ऐसी महफिल कि याद आ गए पुराने दिन

Published: Thu, 24 Sep 2026 07:33 PM (IST)

पटना के एलएन मिश्रा इंस्टीट्यूट में पूर्व शिक्षिका सुचित्रा गौरी की जयंती पर 'सांझ के सुर संगीत की एक शाम' ...और पढ़ें

आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करतीं सांसद शांभवी चौधरी और साथ में अन्य। सौः संस्थान।

आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करतीं सांसद शांभवी चौधरी और साथ में अन्य। सौः संस्थान।

HighLights

  1. एलएन मिश्रा इंस्टीट्यूट, पटना में यादगार संगीत संध्या का आयोजन।

  2. पुराने फिल्मी गीतों और शास्त्रीय धुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

  3. संगीत कार्यक्रम से पशु कल्याण और शिक्षा के लिए धन जुटाया गया।

जागरण संवाददाता, पटना। पटना के एलएन मिश्रा इंस्टीट्यूट में गुरुवार की शाम कुछ अलग रही। परिसर में जब ‘कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया’ के सुर गूंजे तो पुराने दौर की यादें ताजा हो गईं। इसके बाद ‘बड़े अच्छे लगते हैं’, ‘एक प्यार का नगमा है’ और ‘ये रातें ये मौसम’ जैसे गीतों ने माहौल को और खुशनुमा बना दिया।

‘बड़े अच्छे लगते हैं’ से जुड़ीं पुरानी यादें

‘सांझ के सुर संगीत की एक शाम’ कार्यक्रम में एक के बाद एक सदाबहार गीतों की प्रस्तुति हुई। विद्यार्थियों के साथ संगीत प्रेमियों ने भी इन गीतों का आनंद लिया। ‘इतना न मुझसे तू प्यार बढ़ा’ और ‘ये शाम मस्तानी’ ने कार्यक्रम के माहौल को यादगार बना दिया।

‘ये रातें ये मौसम’ के बाद शास्त्रीय सुर

फिल्मी गीतों के साथ कार्यक्रम में शास्त्रीय रचनाएं भी प्रस्तुत की गईं। भजन ‘शिव कैलाशों के वासी’ की प्रस्तुति ने संगीत की इस शाम को एक अलग रंग दिया। गीतों और शास्त्रीय संगीत के मेल ने पूरे कार्यक्रम को विविधता दी।

सुचित्रा गौरी की स्मृति में हुई संगीत की शाम

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का आयोजन पूर्व शिक्षिका सुचित्रा गौरी की जयंती के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम में समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी, डॉ. सत्यजीत कुमार सिंह, विद्यार्थी और संगीत प्रेमी शामिल हुए।

सुरों के साथ सामाजिक सरोकार भी

कार्यक्रम में संगीत को सामाजिक कार्यों से जोड़ने की पहल भी सामने आई। आयोजन से जुटी राशि का इस्तेमाल पशु देखभाल और संगीत शिक्षा से जुड़े कार्यों में करने की बात कही गई है। अपना फाउंडेशन बेसहारा पशुओं के बचाव और उपचार का काम करता है।

लोक संगीत से दृष्टिबाधित बच्चों तक

ग्रामोत्सव लोक संगीत और कला के जरिए बिहार के लोगों को जोड़ने का काम करता है। इसके तहत दृष्टिबाधित बच्चों को सुनने, ताल और अभ्यास के माध्यम से संगीत सिखाने की पहल भी चल रही है।

इस तरह ‘कौन दिशा में’ से शुरू हुई यह संगीत की शाम ‘ये शाम मस्तानी’ तक पहुंचते-पहुंचते यादों और सुरों का खूबसूरत सिलसिला बन गई।