बेटे के लिए मां ने रखा था जिउतिया, पटना में पर्व के दिन उसी के पुतले को दी अंतिम विदाई; शव लापता
मनेर के खासपुर निवासी आशुतोष कुमार का गंगा में डूबने के पांच दिन बाद भी शव नहीं मिलने पर स्वजनों ...और पढ़ें

पुतले की विदाई ने बढ़ाया दर्द
HighLights
आशुतोष कुमार गंगा में डूबने के पांच दिन बाद भी लापता।
शव न मिलने पर परिवार ने बेटे के पुतले का दाह-संस्कार किया।
जिउतिया व्रत रखने वाली मां ने पुतले को अंतिम विदाई दी।
जागरण संवाददाता, मनेर(पटना)। मनेर के खासपुर निवासी अमरनाथ राय के 24 वर्षीय बेटे आशुतोष कुमार का गंगा में डूबने के पांच दिन बाद भी शव नहीं मिल सका। बेटे की तलाश में एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों ने काफी प्रयास किए, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
आखिरकार शुक्रवार को स्वजनों ने भारी मन से आशुतोष के पुतले का दाह-संस्कार किया। इस दौरान परिवार की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। सबसे मार्मिक दृश्य तब रहा, जब मां बेटे के पुतले को अंतिम विदाई देते हुए फूट-फूटकर रो पड़ी।
जिउतिया में मां ने मांगी थी बेटे की लंबी उम्र
जिस बेटे की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए मां ने जिउतिया पर्व पर निर्जला व्रत रखा था, उसी मां को शुक्रवार को उसके पुतले की अंतिम विदाई देनी पड़ी।
पुतले के दाह-संस्कार के दौरान मां की चीत्कार से वहां मौजूद लोगों का कलेजा कांप उठा। स्वजन और ग्रामीण गम में डूबे रहे।
तीन दोस्तों को बचाया, खुद गंगा में लापता
बताया गया कि 27 सितंबर को आशुतोष अपने दोस्तों अरविंद, रंजन और प्रिंस के साथ गांव के सामने छितनावां में गंगा नदी में स्नान करने गया था।
स्नान के दौरान तीन दोस्त डूबने लगे। उन्हें डूबता देख आशुतोष उन्हें बचाने के लिए गंगा में कूद पड़ा। उसने तीनों दोस्तों को बचा लिया, लेकिन तेज धार और गहरे पानी में खुद लापता हो गया।
पांच दिन से चल रही तलाश, नहीं मिला सुराग
आशुतोष के गंगा में लापता होने के बाद से ही उसकी तलाश जारी थी। एसडीआरएफ के साथ स्थानीय लोग भी नदी में खोजबीन कर रहे थे।
परिवार को उम्मीद थी कि बेटे का कोई सुराग मिल जाएगा, लेकिन पांच दिन गुजरने के बाद भी शव बरामद नहीं हो सका। शव नहीं मिलने से परिवार की बेचैनी और बढ़ती गई।
पुतले की विदाई ने बढ़ाया दर्द
शुक्रवार को जब आशुतोष के पुतले को अंतिम विदाई दी गई तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। मां बेटे के पुतले को देखकर खुद को संभाल नहीं सकी।
उसकी चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं। परिवार के लिए यह पल इसलिए भी बेहद पीड़ादायक था कि बेटे का शव तक उन्हें नसीब नहीं हुआ।
बेटे का इंतजार खत्म नहीं, बस रस्म निभानी पड़ी
आशुतोष के पुतले का दाह-संस्कार कर दिया गया, लेकिन परिवार के मन में बेटे के लौटने की टीस अब भी बाकी है। गंगा की तेज धार में लापता हुए आशुतोष का शव पांच दिन बाद भी नहीं मिल सका है।
खासपुर गांव में मातम पसरा है और परिवार अब भी उस बेटे की तलाश में है, जिसे मां ने कभी जिउतिया में लंबी उम्र का आशीर्वाद दिया था।
