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पुरानी विरासत, नया आकर्षण; संवरकर निखरेगी पटना की 108 साल पुरानी पानी टंकी

Published: Wed, 28 Oct 2026 05:50 PM (IST)

पटना के मिलर हाई स्कूल परिसर में 108 साल पुरानी ऐतिहासिक पानी टंकी का 3.49 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार किया जाएगा।

सीएम सम्राट ने ऐतिहासिक पानी टंकी के जीर्णोद्धार, सौंदर्गीकरण एवं कैफेटेरिया निर्माण कार्य का शिलान्यास किया।

सीएम सम्राट ने ऐतिहासिक पानी टंकी के जीर्णोद्धार, सौंदर्गीकरण एवं कैफेटेरिया निर्माण कार्य का शिलान्यास किया।

HighLights

  1. 108 साल पुरानी पानी टंकी का 3.49 करोड़ से जीर्णोद्धार।

  2. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परियोजना का शिलान्यास किया।

  3. मूल स्वरूप बरकरार रखते हुए आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाएंगी।

जागरण संवाददाता, पटना। वक्त की परतों में इतिहास को समेटे मिलर हाई स्कूल परिसर की 108 साल पुरानी पानी टंकी अब नए रूप में निखरने को तैयार है। वर्षों से अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ खड़ी यह टंकी अब सिर्फ अतीत की निशानी बनकर नहीं रहेगी, बल्कि अपनी खूबसूरती से लोगों को आकर्षित भी करेगी।

इसकी पुरानी पहचान को बरकरार रखते हुए परिसर को संवारा जाएगा। टंकी के चारों ओर गोलाकार पाथ-वे, हरियाली से सजी लैंडस्केपिंग और आधुनिक रोशनी इसकी सुंदरता में चार चांद लगाएगी। वहीं, पर्यटकों और आगंतुकों की सुविधा के लिए कैफेटेरिया भी बनाया जाएगा।

बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया। 3.49 करोड़ रुपये की इस परियोजना की खास बात यह है कि पानी टंकी के मूल ऐतिहासिक और स्थापत्य स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उसका जीर्णोद्धार किया जाएगा।

पुराने ढांचे की पहचान मिटाए बिना उसे नया जीवन देने की योजना है। इसके लिए न्यूनतम हस्तक्षेप और मूल संरचना के अधिकतम संरक्षण का सिद्धांत अपनाया जाएगा। जीर्णोद्धार में पारंपरिक, टिकाऊ और संरचना के अनुकूल सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि ऐतिहासिक धरोहर की मौलिकता बनी रहे।

मुख्यमंत्री ने पानी टंकी परिसर का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहरी आधारभूत संरचना के विकास, ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मिलर हाई स्कूल परिसर की ऐतिहासिक पानी टंकी का जीर्णोद्धार इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने परिसर को सुव्यवस्थित और आकर्षक विरासत स्थल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। काम पूरा करने के लिए छह महीने की अवधि तय की गई है। नगर विकास एवं आवास विभाग तथा नगर निगम के अंतर्गत इस परियोजना को पूरा किया जाएगा।

शिलान्यास के अवसर पर नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मुख्यमंत्री को जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण की योजना की जानकारी दी। इस दौरान प्रस्तावित कार्यों पर आधारित वीडियो फिल्म भी दिखाई गई।

इस अवसर पर नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा, सांसद रविशंकर प्रसाद, विधायक संजीव चौरसिया, विधायक रत्नेश कुमार, महापौर सीता साहू, उप महापौर रेशमी कुमारी, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव संदीप कुमार आर पुडुकलकट्टी, जिलाधिकारी कुंदन कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

130 फीट ऊंची टंकी में स्टीम इंजन से चढ़ता था पानी

वीरचंद पटेल पथ पर मिलर हाईस्कूल के पास खड़ी ऐतिहासिक पानी टंकी पटना की उस दौर की कहानी अपने भीतर समेटे है, जब शहर में पानी पहुंचाने के लिए स्टीम इंजन का सहारा लिया जाता था। वर्ष 1915 से 1918 के बीच बनी यह टंकी करीब 130 फीट ऊंची है, जो पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था की गवाह है।

वर्ष 1915 से 1918 के बीच बनी इस टंकी में करीब एक लाख गैलन पानी संग्रहित किया जा सकता था। खास बात यह है कि उस समय पानी को ऊपर चढ़ाने के लिए आधुनिक मोटर नहीं, बल्कि स्टीम इंजन का इस्तेमाल होता था।

एएन कॉलेज के पास स्थित कुएं से स्टीम इंजन के जरिये पानी इस पानी टंकी तक पहुंचाया जाता था। जैसे ही टंकी पूरी भर जाती थी, यहां से लाल सिग्नल दिखाया जाता था। यह संकेत एएन कॉलेज के पास लगे स्टीम इंजन तक पहुंचता था और इंजन बंद कर दिया जाता था।

टंकी की यह व्यवस्था उस समय की तकनीकी समझ और इंजीनियरिंग का उदाहरण थी। फ्लोटिंग इंडिकेटर तकनीक से पानी का स्तर बढ़ने के साथ इंडिकेटर की स्थिति बदलती थी और पानी टंकी के भरने का संकेत मिलता था। उस समय इससे जुड़ा जलापूर्ति नेटवर्क 200 से 250 किलोमीटर तक फैला हुआ था।

पहले यह व्यवस्था बांकीपुर वाटर सप्लाई हेड वर्क्स के अंतर्गत थी। इसके जरिये वर्तमान के नूतन राजधानी, पाटलिपुत्र और बांकीपुर अंचल के विभिन्न क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जाता था।

यानी आज जिन इलाकों में शहर का बड़ा हिस्सा बसा हुआ है, वहां दशकों पहले इसी व्यवस्था के जरिये घरों तक पानी पहुंचता था। सितंबर 1978 तक टंकी से जलापूर्ति होती रही। इसके बाद यह ऐतिहासिक ढांचा उपयोग से बाहर हो गया।

लाल ईंटों से बनी है गुंबददार संरचना वाली पानी टंकी

लाल ईंटों से बनी इस पानी टंकी की स्थापत्य शैली भी इसे खास बनाती है। गुंबददार संरचना वाली यह इमारत करीब एक सदी से अधिक समय से शहर के बदलते स्वरूप की गवाह रही है। पानी टंकी के साथ पूरे परिसर का भी विकास किया जाएगा। करीब 14,400 वर्गफीट क्षेत्र में समग्र विकास की योजना है।

सजावटी रोशनी से पानी टंकी को आकर्षक रूप दिया जाएगा। जलीमनार परिसर में पहले दो जलापूर्ति केंद्र थे। एक जलापूर्ति केंद्र समेत करीब 60 प्रतिशत जमीन एमएलसी आवास के लिए चली गई। बचे जलापूर्ति केंद्र की क्षमता 120 अश्वशक्ति है, जो अभी चालू है।

परिसर में करीब 2,500 वर्गफीट क्षेत्र में आधुनिक कैफेटेरिया भी बनाया जाएगा। इसमें बैठने की जगह, रसोई, काउंटर और अन्य जरूरी सुविधाएं होंगी। इससे विद्यार्थियों, लोगों और यहां आने वाले पर्यटकों को सुविधा मिलेगी।

पानी टंकी की नींव सुरक्षित, पारंपरिक तकनीक से होगा जीर्णोद्धार

पानी टंकी की स्थिति का आकलन एनआइटी पटना के सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पानी टंकी में समग्र झुकाव, नींव में दरार या मिट्टी के अलग होने के संकेत नहीं मिले। हालांकि, कुछ स्थानों पर नमी, लिंटल में दरार और सीढ़ियों की खराब स्थिति जैसी समस्याएं मिली हैं।

इनके सुधार को जीर्णोद्धार योजना में शामिल किया गया है। मूल निर्माण सामग्री के अनुकूल चूने आधारित और सांस लेने योग्य पारंपरिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा।

अनावश्यक बदलाव से बचते हुए मौजूदा संरचना को सुरक्षित रखने की योजना है। प्रस्ताव में पानी टंकी की वास्तुकला को उभारने के लिए वार्म एलईडी लाइट लगाने की भी योजना है। इससे रात में भी इसकी पहचान बनी रहेगी।

पाथ-वे और रोशनी से बढ़ेगी परिसर की रौनक

योजना के तहत 10,880 वर्गफीट में हेरिटेज गार्डन विकसित किया जाएगा। इसके मध्य में ऐतिहासिक पानी टंकी होगी, जिसके चारों ओर पौधों की क्यारियां और हरियाली विकसित की जाएगी। मुख्य प्रवेश द्वार से पानी टंकी तक पैदल पथ बनेगा, जिसके दोनों ओर छायादार पेड़ लगाए जाएंगे।

चारदीवारी पर प्राकृतिक पत्थरों की क्लैडिंग और सजावटी लोहे की रेलिंग होगी। प्रवेश द्वार पर कलात्मक लोहे का गेट और खंभों पर सजावटी लाइटें लगाई जाएंगी। परिसर में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था भी होगी। पानी टंकी के चारों ओर गोलाकार पाथ-वे और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था से इसकी सुंदरता निखारी जाएगी।

साथ ही, पर्यटकों और आगंतुकों की सुविधा के लिए आधुनिक कैफेटेरिया बनाया जाएगा। इस तरह ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करते हुए परिसर को आकर्षक और सुव्यवस्थित रूप दिया जाएगा।

  • 14,400 वर्गफीट क्षेत्र का होगा विकास
  • 2,500 वर्गफीट में बनेगा कैफेटेरिया
  • 4,325 वर्गफीट में परिसर विकसित होगा
  • 1,963.50 वर्गफीट क्षेत्र में है पानी टंकी
  • 5,600 वर्गफीट में बिछेगा पेवर ब्लॉक