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रेंट से दोस्ती, दोस्ती से प्यार और फिर शादी: बिहार राज्य महिला आयोग बना मंडप, 2 घंटे ड्रामा के बाद भरी मांग

Published: Fri, 03 Apr 2026 05:16 PM (GMT+05:30)

पटना में एक प्रेमी जोड़े की शादी का मामला बिहार राज्य महिला आयोग पहुंचा। परिवार के विरोध के बावजूद, किराएदारी ...और पढ़ें

बिहार राज्य महिला आयोग

बिहार राज्य महिला आयोग

HighLights

  1. महिला आयोग में दो घंटे चला शादी का ड्रामा।

  2. परिवार के विरोध के बावजूद लड़के ने भरी मांग।

  3. किराएदारी से शुरू हुई प्रेम कहानी शादी तक पहुंची।

जागरण संवाददाता, पटना। पटना में महिला आयोग का दफ्तर उस वक्त फिल्मी सेट में बदल गया। करीब दो घंटे तक हंगामा और बहस का दौर चलता रहा। परिवार के विरोध और तनाव के बीच माहौल गरम रहा।

स्थिति को संभालने के लिए डायल 112 की टीम भी बुलानी पड़ी। हर कोई इस ‘रील जैसी’ कहानी का रियल अंत देखने का इंतजार कर रहा था। और आखिर में लड़के ने सबके सामने लड़की की मांग भर दी।

कोर्ट मैरेज के बाद भी नहीं मानी फैमिली

दोनों ने पहले ही 2 जुलाई 2025 को कोर्ट मैरेज कर ली थी। तीन गवाहों की मौजूदगी में शादी कानूनी रूप से हो चुकी थी। इसके बावजूद लड़के का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था।

लगातार बहाने बनाकर शादी को टालने की कोशिश होती रही। परिवार ने इस रिश्ते को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। यही वजह बनी इस पूरे ड्रामे की शुरुआत की।

किराएदारी से शुरू हुई प्यार की कहानी

लड़की पहले लड़के के घर किराएदार बनकर रहने आई थी। करीब ढाई साल पहले दोनों की मुलाकात हुई थी। धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई।

छह महीने बाद दोनों ने अपने रिश्ते को नाम दिया। फिर साथ जीने-मरने की कसमें खाईं। और आखिरकार शादी करने का फैसला कर लिया।

परिवार का विरोध और घर से बेदखली

जब परिवार को शादी की जानकारी मिली तो बवाल मच गया। लड़के के माता-पिता और रिश्तेदारों ने कड़ा विरोध किया। लड़के पर पत्नी को छोड़ने का दबाव बनाया गया।

इतना ही नहीं, उसे घर और संपत्ति से बेदखल कर दिया गया। धमकियां भी दी गईं कि रिश्ता खत्म कर दो। लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी और साथ रहने का फैसला किया।

आयोग के सामने फिल्मी अंदाज में शादी

आखिरकार मामला बिहार राज्य महिला आयोग पहुंचा। अध्यक्ष प्रो. अप्सरा मिश्रा और सदस्यों की मौजूदगी में सुनवाई हुई। दोनों बालिग थे और अपनी मर्जी से शादी कर चुके थे।

परिवार को मनाने की काफी कोशिश की गई। लेकिन जब कोई रास्ता नहीं निकला तो वहीं शादी का फैसला हुआ। और लड़के ने सबके सामने सिंदूर भरकर रिश्ता पक्का कर दिया।

अब अलग रहकर शुरू करेंगे नई जिंदगी

फिलहाल दोनों ने अलग किराए के घर में रहने का फैसला किया है। सुरक्षा को देखते हुए लोकेशन सार्वजनिक नहीं की गई है। महिला आयोग इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ली गई है। उन्हें 15 अप्रैल को फिर से सुनवाई के लिए बुलाया गया है। अब यह लव स्टोरी नए अध्याय की ओर बढ़ चुकी है।

प्यार बनाम परिवार की जंग में किसकी जीत

यह कहानी पूरी तरह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है। जहां एक तरफ परिवार का दबाव था, वहीं दूसरी ओर सच्चा प्यार। अंत में प्यार ने जीत हासिल की और समाज को एक संदेश दिया।

बालिग होने पर अपनी पसंद से शादी का अधिकार अहम है। हालांकि परिवार की सहमति भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है। अब देखना होगा कि आगे यह रिश्ता किस दिशा में जाता है।