श्रवण कुुमार, पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'जान है तो जहान है' संदेश के बाद देशव्यापी लॉकडाउन में जहां प्रशासन बाहर निकलने वालों पर सख्ती बरत रहा है, वहीं उन बेसहारा लोगों के लिए ठिकाना और खाने की भी व्यवस्था हो रही है जो जहां-तहां भटकते फिर रहे हैं। शासन और प्रशासन ऐसे भटकने वालों की सुध लेकर ठौर देने में जुट गया है। गुरुवार को पटना में पहले कम्युनिटी किचन (सामुदायिक रसोई) की शुरुआत हो गई। डीएम कुमार रवि के निर्देश पर जिला आपदा प्रबंधन विभाग ने इसकी पहल की है।

आपदा प्रबंधन के अपर समाहर्ता मृत्युंजय कुमार की मॉनीटरिंग में प्रखंड विकास पदाधिकारी रंजीत कुमार वर्मा और अंचलाधिकारी प्रवीण कुमार पांडे इस कम्युनिटी किचन की पूरी व्यवस्था में लगे हुए हैं। गर्दनीबाग के पटना हाई स्कूल में पहले कम्युनिटी किचन में पहले दिन से ही लगभग 100 बेसहारा लोगों के रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। हाई स्कूल के 27 में 25 कमरों में रहने के इंतजाम हैं। कमरे के चारों कोने में एक-एक बेड लगाया गया है। एक कमरे में कुल चार लोग ठहरेंगे। इन लोगों के खाने की व्यवस्था भी यहीं होगी। चावल, दाल, रोटी, सब्जी खाने को दी जाएगी।

इस व्यवस्था की कमान संभाले अंचलाधिकारी ने बताया कि यहां ठहरने वाले वैसे लोग हैं, जिनका कोई ठिकाना नहीं है। प्रशासन को शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग जहां-तहां भटक रहे हैं। भटकते हुए कुछ लोगों को थाने पर भी लाया गया था। 46 लोग नेपाली टोला से लाए गए हैं और 14 जक्कनपुर थाना से। कहीं और भी ऐसे लोग मिलेंगे तब उनके लिए भी व्यवस्था होगी।

वैसे लोगों को भी यहां बसेरा मिलेगा जो कहीं से पटना आ गए हैं, पर अपने घर तक नहीं जा पाए। बताया गया कि यहां ठहरने वाले लोगों की च्सोशल डिस्टेंसिंगज् का पूरा ख्याल रखा जाएगा। यही वजह है कि एक कमरे में मात्र चार लोग ठहरेंगे। खाना बनाने और खिलाने के दौरान भी सैनिटाइजेशन के मानकों का पालन किया जाएगा। बताया गया कि पटना में कुछ और भी स्कूलों में इस तरह की व्यवस्था की जाएगी।

जंक्शन के भिखारियों को समाजसेवियों की मदद का इंतजार

कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया गया है। लॉकडाउन का सबसे अधिक असर राजधानी के भिखारियों व लावारिसों पर देखने को मिल रहा है। आम नागरिक को तो किसी न किसी तरह दो जून की रोटी नसीब हो जा रही है, परंतु इन भिखारियों को देखने वाला कोई नहीं। पिछले चार दिन से भोजन नसीब नहीं हो रहा है। पानी भी बमुश्किल मिल पा रहा है। पहले स्टेशन के अंदर उन्हें आश्रय मिला था। लॉकडाउन होने के बाद उन्हें बाहर निकाल दिया गया। इनमें से एक भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गया तो पूरे शहर को इसकी परेशानी उठानी पड़ेगी। ऐसे में लॉकडाउन की सफलता को संदेह के कठघरे में खड़ा कर रहे हैं ये भिखारी। जंक्शन के बाहर महावीर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा इन भिखारियों को दोनों शाम भोजन मुहैया करा दिया जाता था। भिखारियों की मानें तो पहले इतना अधिक भोजन मिल जाता था कि वे लोग छोड़ देते थे। आज किसी रहनुमा ने उन्हें चूड़ा-गुड़ दिया है, जिसे वे पूरी-मिठाई से भी अधिक बेहतर भोजन मान रहे हैं। राजधानी में ऐसा कोई रैन बसेरा भी नहीं जहां जाकर वे लोग शरण भी ले सकें। अभी यह संकट लंबा चलने वाला है।

पटना में फंसे 22 लोगों को भेजा गया घर

केरला, राजस्थान सहित अन्य राज्यों से पटना पहुंचे दो दर्जन से अधिक लोगों को जक्कनपुर और बाईपास के पास पुलिस ने भटकते हुए पकड़ा। एसडीओ को सूचना देने के बाद सभी की जांच कर गर्दनीबाग स्थित पटना हाईस्कूल में रखा गया। यहां भोजन का इंतजाम करने के बाद उन्हें उनके घर दरभंगा, समस्तीपुर और भागलपुर भेजा गया। पुलिस ने स्पेशल इंटर स्टेट परमिट के लिए जिला प्रशासन से बात की। जिला प्रशासन ने एक स्पेशल गाड़ी भागलपुर और एक गाड़ी समस्तीपुर, दरभंगा भेजने का परमिट मिला और सभी को गंतव्य की ओर रवाना किया गया।

Posted By: Akshay Pandey

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